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क्या IVF 100% सफल है? सफलता दर का असल मतलब क्या है

नहीं, किसी भी मरीज, क्लिनिक या उम्र के लिए IVF 100% सफल नहीं होता — कोई भी फर्टिलिटी (fertility) इलाज गर्भावस्था (pregnancy) या बच्चे की गारंटी नहीं दे सकता। इसके नतीजे पूरी तरह से जैविक कारकों (biological factors) पर निर्भर करते हैं, जैसे अंडे और स्पर्म (sperm) की क्वालिटी, भ्रूण (embryo) का विकास और बच्चेदानी (uterus) का माहौल। अगर कोई क्लिनिक 100% सफलता या गारंटी का दावा करता है, तो वह चिकित्सकीय या आंकड़ों के लिहाज से ईमानदार नहीं है।

Medically reviewed by Dr. Shweta Agarwal, MBBS, DGO · Last updated July 2026
Dr. Shweta Agarwal, Founder & Lead Fertility Specialist, at Aansh Hospital & IVF Center, Chandrapur Govt. ART-registered
Dr. Shweta Agarwal MBBS, DGO · Reproductive Medicine
5,000+IVF babies
30+Years of experience
4.9★500+ reviews · Google, JustDial, Practo
94%AI embryo-analysis accuracy · Garbha.ai
ART Level 2 RegisteredGovt. of India — ART Act 2021
Dr. Shweta AgarwalMBBS, DGO · Reproductive Medicine
On-site embryology labLed by Aayush Agarwal, Ph.D.
Marathi · Hindi · EnglishChandrapur · Nagpur · Vidarbha

By Dr. Shweta Agarwal, MBBS, DGO Medically reviewed by Dr. Shweta Agarwal, MBBS, DGO · July 2026

इस पेज पर दी गई जानकारी शैक्षिक है और यह किसी मेडिकल परामर्श का विकल्प नहीं है। इसके परिणाम हर मरीज की स्थिति (clinical factors) पर निर्भर करते हैं और इनकी गारंटी नहीं दी जा सकती।

Aansh Hospital & IVF Center एक सरकारी मान्यता प्राप्त Level-2 ART क्लिनिक है (Reg. No. MH/AC/2024/15441/L2/Chandrapur/132), जो चंद्रपुर, नागपुर और पूरे विदर्भ क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा है। Our government ART registration के तहत हमारी इन-हाउस एम्ब्रियोलॉजी (embryology) टीम रेगुलेटेड IVF और ICSI इलाज करती है।


फर्टिलिटी (fertility) का इलाज शुरू करने वाले जोड़े अक्सर सीधे पूछते हैं: क्या IVF 100% सफल होता है, या इसके करीब? यह सवाल पूछना बिल्कुल स्वाभाविक है — IVF को सबसे एडवांस फर्टिलिटी ट्रीटमेंट माना जाता है, और यह उम्मीद करना भी लाजिमी है कि "एडवांस" का मतलब "निश्चित सफलता" होगा। लेकिन ईमानदारी से कहें तो, दुनिया भर में कोई भी फर्टिलिटी इलाज 100% सफल नहीं है। अगर कोई ऐसा दावा करता है, तो आपको बहुत सावधान रहने की जरूरत है।

इस पेज में बताया गया है कि IVF की गारंटी क्यों नहीं दी जा सकती, एक साइकिल (cycle) सफल होगी या नहीं यह असल में किन बातों पर निर्भर करता है, विज्ञापनों में दिखाए जाने वाले एकतरफा प्रतिशत (percentages) भ्रामक क्यों हो सकते हैं, और सही जानकारी पाने के लिए आपको किसी भी क्लिनिक (जिसमें हमारा क्लिनिक भी शामिल है) से क्या सवाल पूछने चाहिए।

क्या कभी किसी IVF का सक्सेस रेट 100% होता है?

नहीं — अगर बड़ी संख्या में मरीजों का ईमानदारी से आकलन किया जाए, तो IVF का सक्सेस रेट (success rate) कभी 100% के करीब भी नहीं होता। कोई भी प्रामाणिक क्लिनिक या पब्लिश्ड रजिस्ट्री 100% का आंकड़ा नहीं देती। यहां तक कि सबसे अनुकूल स्थिति वाले मरीजों में भी — जैसे वे युवा मरीज जिनकी ओवेरियन रिज़र्व (ovarian reserve) बहुत अच्छी है और कोई दूसरी जटिलता नहीं है — कई साइकिल लाइव बर्थ (live birth) तक नहीं पहुंच पातीं। इसकी वजह यह है कि मेडिकल तकनीक शरीर की जैविक अनिश्चितताओं (biological variability) को पूरी तरह से खत्म नहीं कर सकती।

यह बात अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सच है और सिर्फ किसी एक देश या क्लिनिक पर लागू नहीं होती। बड़ी फर्टिलिटी रजिस्ट्रियां, जो उम्र के हिसाब से नतीजे प्रकाशित करती हैं, लगातार यह दिखाती हैं कि सबसे कम उम्र और अनुकूल स्थिति वाले मरीजों में भी प्रति ट्रांसफर (per transfer) लाइव बर्थ रेट 100% से काफी कम होती है। उम्र बढ़ने के साथ यह दर और भी कम हो जाती है। अगर आपसे कोई 100% या लगभग 100% सफलता का दावा करता है, तो इसे एक खतरे की घंटी (red flag) समझें, न कि कोई आश्वासन।

असल में किन बातों पर निर्भर करता है कि IVF साइकिल सफल होगी या नहीं?

IVF के नतीजे कई जैविक कारकों (biological factors) से तय होते हैं, जिन्हें कोई भी क्लिनिक पूरी तरह से कंट्रोल नहीं कर सकता। इनमें महिला की उम्र और अंडे की क्वालिटी, स्पर्म की क्वालिटी, भ्रूण (embryo) का विकास और बच्चेदानी की परत (uterine lining) की स्थिति शामिल हैं। इनमें से हर एक कारक यह तय करने में अहम भूमिका निभाता है कि कोई साइकिल एक सफल गर्भावस्था और बच्चे के जन्म (live birth) तक पहुंचेगी या नहीं।

महिला की उम्र सबसे बड़ा कारक है, क्योंकि अंडे की क्वालिटी — खास तौर पर क्रोमोसोम (chromosome) के लिहाज से सामान्य अंडों का अनुपात — धीरे-धीरे कम होता जाता है, खासकर 30 की उम्र के आखिरी सालों के बाद। स्पर्म की क्वालिटी (जैसे उसका काउंट, बनावट और गति) फर्टिलाइजेशन (fertilisation) पर असर डालती है, और इसीलिए जरूरत पड़ने पर ICSI का इस्तेमाल किया जाता है। फर्टिलाइजेशन सामान्य होने पर भी, यह जरूरी नहीं कि भ्रूण पूरी तरह से विकसित होकर बच्चेदानी में चिपक (implant) पाए। कई बार एक अच्छा भ्रूण भी सफल नहीं हो पाता अगर ट्रांसफर के समय बच्चेदानी की परत पूरी तरह से तैयार न हो।

चूंकि ये सभी कारक हर व्यक्ति और हर साइकिल में अलग-अलग होते हैं, इसलिए कोई भी क्लिनिक पहले से किसी निश्चित नतीजे का वादा नहीं कर सकता। एक अच्छा क्लिनिक केवल एक सही और वैज्ञानिक (evidence-based) प्रक्रिया अपना सकता है, ताकि सफलता की सबसे अच्छी संभावना बन सके।

विज्ञापनों में दिखाए जाने वाले एकतरफा सक्सेस रेट के प्रतिशत भ्रामक क्यों होते हैं?

होर्डिंग या ब्रोशर पर लिखा एक सीधा प्रतिशत — जैसे "70% सक्सेस रेट" — लगभग हमेशा भ्रामक होता है। इसमें यह नहीं बताया जाता कि यह आंकड़ा किस आधार पर निकाला गया है, 'सफलता' की उनकी परिभाषा क्या है, यह किस उम्र के लोगों पर लागू होता है, और इसमें कितने मरीजों को शामिल किया गया है। अगर इन पैमानों को थोड़ा भी बदल दिया जाए, तो उन्हीं आंकड़ों को बहुत अलग तरीके से पेश किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए, "प्रति एम्ब्रियो ट्रांसफर" (per embryo transfer) का रेट "प्रति साइकिल शुरू होने" (per cycle started) के रेट से ज्यादा दिखेगा, क्योंकि रद्द हो चुकी साइकिलों को इस छोटे आंकड़े से हटा दिया जाता है। इसी तरह "क्लिनिकल प्रेग्नेंसी" पर आधारित रेट "लाइव बर्थ" (बच्चे का सही-सलामत जन्म) पर आधारित रेट से ज्यादा दिखेगा, क्योंकि इसमें बाद में होने वाले मिसकैरेज (miscarriage) को शामिल नहीं किया जाता। और अगर सभी उम्र के मरीजों का मिलाकर एक रेट बताया जाए, तो उसमें क्लिनिक के सबसे युवा मरीजों के नतीजे हावी होते हैं। इससे ज्यादा उम्र के मरीजों को सही स्थिति का पता नहीं चल पाता।

बिना सही जानकारी के इस तरह का एकतरफा सक्सेस रेट दिखाना भारतीय चिकित्सा विज्ञापन नियमों (Indian medical advertising norms) के तहत भी प्रतिबंधित है — परिणाम की गारंटी और ऐसे अधूरे सफलता प्रतिशत इसलिए बैन हैं क्योंकि ये मरीजों को गुमराह करते हैं और उन्हें ऐसी उम्मीद देते हैं जो असल में मौजूद नहीं है। हमारी गाइड, how to read an IVF success-rate claim, इन सभी छिपी हुई बातों को विस्तार से समझाती है।

सक्सेस रेट के बारे में आपको किसी भी क्लिनिक से क्या सवाल पूछने चाहिए?

आप किसी भी क्लिनिक — जिसमें Aansh भी शामिल है — से यह पूछें कि वे अपने आंकड़े किस आधार पर तय करते हैं, 'सफलता' से उनका क्या मतलब है, क्या यह आंकड़ा आपकी उम्र के लिए है, और क्या इसमें फ्रेश (fresh), फ्रोजन (frozen) या दोनों तरह के ट्रांसफर शामिल हैं। अगर कोई क्लिनिक अपनी प्रक्रिया बताकर इन सभी सवालों के साफ-साफ जवाब देता है, तो वह पारदर्शी है। लेकिन अगर क्लिनिक सिर्फ एक गोल-मोल नंबर बताता है, तो यह सही फैसला लेने के लिए काफी नहीं है।

यह पूछना भी बिल्कुल सही है कि अगर कोई साइकिल सफल नहीं होती, तो आगे क्या होगा — क्या अगली कोशिश के लिए फ्रोजन भ्रूण (frozen embryos) बचे हैं, दूसरी साइकिल कैसी होगी, और सफलता न मिलने पर क्लिनिक मरीजों को भावनात्मक और चिकित्सकीय रूप से कैसे सपोर्ट करता है। एक सिंगल प्रतिशत की तुलना में, ये सवाल आपको क्लिनिक के रवैये के बारे में ज्यादा अच्छी तरह बताते हैं।

एक से ज्यादा साइकिल के बारे में सोचना क्यों जरूरी है?

चूंकि IVF के किसी एक प्रयास में सफलता की गारंटी नहीं होती, इसलिए कई मरीजों को गर्भावस्था तक पहुंचने के लिए एक से ज्यादा एम्ब्रियो ट्रांसफर (embryo transfer) की जरूरत पड़ती है — कभी-कभी यह उसी एग-कलेक्शन साइकिल से होता है (अगर एक से ज्यादा भ्रूण फ्रीज किए गए हों), और कभी-कभी पूरी तरह से एक नई साइकिल से। IVF को सिर्फ 'एक बार में सफलता या पूरी तरह से विफलता' के रूप में देखना गलत उम्मीदें बांधता है, जो कई जोड़ों के वास्तविक फर्टिलिटी ट्रीटमेंट से मेल नहीं खाता।

यह कोई निराशाजनक बात नहीं है — यह बस आगे की योजना (planning) बनाने का एक हिस्सा है। अगर आप शुरुआत से ही यह समझ लें कि एक ट्रांसफर से निश्चित सफलता की उम्मीद करने के बजाय, कई प्रयासों को मिलाकर देखना ज्यादा यथार्थवादी (realistic) है, तो इससे आपको भावनात्मक और आर्थिक रूप से योजना बनाने में मदद मिलती है। 0% EMI जैसे विकल्प दूसरी कोशिश को आर्थिक रूप से आसान बनाते हैं। हमारी गाइड IVF success and age — realistic expectations बताती है कि आपकी उम्र के हिसाब से आपको कैसी योजना बनानी चाहिए।

अपनी सफलता की संभावनाओं के बारे में सोचने का सही और ईमानदार तरीका क्या है?

सबसे ईमानदार तरीका यह है कि आप अपनी उम्र और अपनी मेडिकल रिपोर्ट (clinical profile) के आधार पर क्लिनिक से पारदर्शी जानकारी मांगें — न कि किसी विज्ञापित प्रतिशत पर भरोसा करें। आपका अपना ओवेरियन रिज़र्व, आपके पार्टनर के सीमेन पैरामीटर (semen parameters), और बच्चेदानी की कोई भी स्थिति यह तय करती है कि आपके लिए क्या यथार्थवादी है। कोई भी क्लिनिक का मिला-जुला आंकड़ा आपकी अपनी व्यक्तिगत स्थिति को नहीं बता सकता।

Aansh में, Dr. Shweta Agarwal किसी एक बड़े नंबर का दावा करने के बजाय, आपकी वास्तविक क्लिनिकल स्थिति के आधार पर परामर्श (consultation) के दौरान यथार्थवादी और व्यक्तिगत उम्मीदों पर चर्चा करती हैं। अगर आप अपनी स्थिति को इस तरह की गहराई से समझना चाहते हैं, तो हमारी free second opinion सेवा इसके लिए एक अच्छी शुरुआत हो सकती है।


जानने योग्य

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या IVF की गारंटी होती है (Is IVF guaranteed to work)?
नहीं। कोई भी फर्टिलिटी इलाज, जिसमें IVF भी शामिल है, किसी भी मरीज के लिए गर्भावस्था या बच्चे के जन्म की गारंटी नहीं दे सकता। इसके नतीजे जैविक कारकों (biological factors) पर निर्भर करते हैं — जैसे अंडे की क्वालिटी, स्पर्म की क्वालिटी, भ्रूण का विकास और बच्चेदानी की परत (uterine receptivity) — जिन्हें मेडिकल तकनीक से पूरी तरह कंट्रोल नहीं किया जा सकता। गारंटी के किसी भी दावे से सावधान रहना चाहिए।
किसी भी IVF का सक्सेस रेट 100% क्यों नहीं होता?
क्योंकि IVF के नतीजे कई जैविक कारकों पर निर्भर करते हैं, जो हर मरीज और हर साइकिल में अलग होते हैं। इनमें उम्र से जुड़ी अंडे की क्वालिटी, स्पर्म की क्वालिटी, भ्रूण के विकास की क्षमता और बच्चेदानी की स्थिति शामिल हैं। सबसे अनुकूल मरीजों में भी, काफी साइकिल लाइव बर्थ तक नहीं पहुंच पातीं। दुनिया का कोई भी प्रामाणिक क्लिनिक या फर्टिलिटी रजिस्ट्री 100% सफलता दर की रिपोर्ट नहीं देता।
मेरी IVF साइकिल सफल होगी या नहीं, यह किन बातों पर निर्भर करता है?
इसके मुख्य कारक हैं महिला की उम्र और अंडे की क्वालिटी, स्पर्म की क्वालिटी, भ्रूण का विकास और ट्रांसफर के समय बच्चेदानी की स्थिति। आमतौर पर महिला की उम्र सबसे बड़ा कारक होती है क्योंकि अंडे की क्वालिटी — खासकर क्रोमोसोम के लिहाज से सामान्य अंडों का अनुपात — 30 की उम्र के आखिरी सालों के बाद लगातार कम होता जाता है।
कुछ क्लिनिक बहुत ज्यादा सक्सेस रेट प्रतिशत का विज्ञापन क्यों देते हैं?
ज्यादा प्रतिशत दिखाने के लिए अक्सर एक छोटा आधार (denominator) चुना जाता है (जैसे 'साइकिल शुरू होने' के बजाय 'एम्ब्रियो ट्रांसफर' के आधार पर), या सफलता की ऐसी परिभाषा ली जाती है जो बड़ी दिखे (जैसे 'लाइव बर्थ' के बजाय 'क्लिनिकल प्रेग्नेंसी')। कभी-कभी इसमें सिर्फ कम उम्र के मरीजों को शामिल किया जाता है, जिसका मतलब यह नहीं है कि उनकी देखभाल बेहतर है। बिना पूरी जानकारी के इस तरह के एकतरफा प्रतिशत भ्रामक होते हैं और ऐसे दावों पर भारतीय विज्ञापन नियमों के तहत रोक है।
क्या मुझे ऐसे क्लिनिक पर भरोसा करना चाहिए जो वादा करता है कि IVF मेरे लिए सफल होगा?
कोई भी क्लिनिक ईमानदारी से यह वादा नहीं कर सकता कि किसी खास मरीज के लिए IVF सफल ही होगा, क्योंकि इसके नतीजे ऐसे व्यक्तिगत जैविक कारकों पर निर्भर करते हैं जिनका पहले से पूरी तरह से अनुमान नहीं लगाया जा सकता। एक भरोसेमंद क्लिनिक गारंटी देने के बजाय आपकी अपनी मेडिकल स्थिति और उम्र के आधार पर यथार्थवादी उम्मीदों पर चर्चा करेगा।
क्या एक से ज्यादा IVF साइकिल की जरूरत पड़ने का मतलब यह है कि कुछ गलत हो गया है?
नहीं। चूंकि किसी भी एक प्रयास में सफलता की गारंटी नहीं होती, इसलिए कई मरीजों को गर्भावस्था तक पहुंचने के लिए एक से ज्यादा एम्ब्रियो ट्रांसफर की जरूरत होती है। कभी-कभी उसी साइकिल के फ्रीज किए गए भ्रूणों (frozen embryos) का इस्तेमाल होता है। यह फर्टिलिटी इलाज की योजना का एक सामान्य हिस्सा है, न कि प्रक्रिया के फेल होने का संकेत।
Aansh मरीजों को IVF सक्सेस रेट के बारे में क्या बताता है?
हम किसी एक बड़े सक्सेस रेट प्रतिशत का दावा नहीं करते, क्योंकि बिना प्रक्रिया (methodology) बताए कोई भी नंबर न तो ईमानदार होता है और न ही फायदेमंद। Dr. Shweta Agarwal परामर्श के दौरान आपकी व्यक्तिगत क्लिनिकल स्थिति और उम्र के आधार पर यथार्थवादी उम्मीदों पर चर्चा करती हैं।
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