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आईवीएफ क्या है? विदर्भ के परिवारों के लिए एक सरल गाइड

सबसे पहले जवाब: IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन — आईवीएफ) एक ऐसा इलाज है जिसमें अंडाशय (ovaries) से अंडाणु (eggs) निकालकर, उन्हें एम्ब्रियोलॉजी लैब (embryology lab) में शुक्राणु (sperm) के साथ मिलाया जाता है और एक भ्रूण (embryo) में विकसित किया जाता है। उस भ्रूण को फिर गर्भाशय (uterus) में रखा जाता है। "टेस्ट ट्यूब बेबी" आईवीएफ से होने वाले बच्चे का लोकप्रिय नाम है — अलग से कोई "टेस्ट ट्यूब बेबी" की प्रक्रिया नहीं होती, और बच्चा किसी ट्यूब में बड़ा नहीं होता। केवल निषेचन (fertilisation) और भ्रूण के विकास के शुरुआती कुछ दिन लैब में होते हैं।

Medically reviewed by Dr. Shweta Agarwal, MBBS, DGO · Last updated July 2026
Dr. Shweta Agarwal, Founder & Lead Fertility Specialist, at Aansh Hospital & IVF Center, Chandrapur Govt. ART-registered
Dr. Shweta Agarwal MBBS, DGO · Reproductive Medicine
5,000+IVF babies
30+Years of experience
4.9★500+ reviews · Google, JustDial, Practo
94%AI embryo-analysis accuracy · Garbha.ai
ART Level 2 RegisteredGovt. of India — ART Act 2021
Dr. Shweta AgarwalMBBS, DGO · Reproductive Medicine
On-site embryology labLed by Aayush Agarwal, Ph.D.
Marathi · Hindi · EnglishChandrapur · Nagpur · Vidarbha

लेखन: Dr. Shweta Agarwal, MBBS, DGO चिकित्सकीय समीक्षा: Dr. Shweta Agarwal, MBBS, DGO अंतिम अपडेट: जुलाई 2026

इस पेज पर दी गई जानकारी शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और यह चिकित्सीय परामर्श का विकल्प नहीं है। टाइमलाइन, प्रोटोकॉल और परिणाम हर मरीज की क्लिनिकल स्थिति पर निर्भर करते हैं और हर मामले के अनुसार तय किए जाते हैं।

अंश हॉस्पिटल एंड आईवीएफ सेंटर (Aansh Hospital & IVF Center) एक सरकार द्वारा पंजीकृत लेवल-2 एआरटी क्लिनिक (Reg. No. MH/AC/2024/15441/L2/Chandrapur/132) है, जिसका मुख्यालय और इन-हाउस एम्ब्रियोलॉजी लैब चंद्रपुर में है। हम विदर्भ और उत्तरी तेलंगाना के परिवारों को अपनी सेवाएँ देते हैं। इलाज का नेतृत्व डॉ. श्वेता अग्रवाल (MBBS, DGO) करती हैं, और एम्ब्रियोलॉजी का नेतृत्व आयुष अग्रवाल, Ph.D. करते हैं। हमारा सरकारी एआरटी पंजीकरण नेशनल ART एंड सरोगेसी रजिस्ट्री पर सत्यापित किया जा सकता है।


विदर्भ के ज्यादातर जोड़े "IVF" शब्द पहली बार किसी रिश्तेदार, पड़ोसी या किसी व्यस्त ओपीडी में सुनते हैं — और फिर जवाबों से ज्यादा सवालों के साथ घर लौटते हैं। क्या टेस्ट ट्यूब बेबी, IVF से कुछ अलग है? क्या बच्चा सच में कांच की ट्यूब में पलता है? क्या यह सिर्फ उन लोगों के लिए है जिनका हर इलाज "फेल" हो चुका है? इसका असली खर्च कितना है, और क्या हमें हफ्तों तक नागपुर या पुणे में रहना पड़ेगा?

यह गाइड आपके इन्ही सवालों के जवाब क्रमानुसार देती है। हम आपको वही सही और स्पष्ट जानकारी देना चाहते हैं जिसकी आपको तलाश है।

आईवीएफ क्या है (ivf kya hai)

आईवीएफ एक ऐसा इलाज है जिसमें निषेचन (fertilisation) शरीर के अंदर होने के बजाय प्रयोगशाला (laboratory) में किया जाता है। प्राकृतिक रूप से गर्भधारण में, अंडाणु (egg) अंडाशय (ovary) से निकलकर फैलोपियन ट्यूब में जाता है, वहां शुक्राणु (sperm) से मिलता है, निषेचन होता है, और उससे बना भ्रूण (embryo) गर्भाशय (uterus) में आकर स्थापित (implant) होता है। आईवीएफ में इस यात्रा का बीच का हिस्सा शरीर के बाहर किया जाता है।

एक सामान्य आईवीएफ चक्र (IVF cycle) में ये शामिल होते हैं:

  1. अंडाशय उत्तेजना (Ovarian stimulation) — हार्मोन इंजेक्शन (hormone injections) दिए जाते हैं ताकि एक चक्र में सामान्य एक अंडाणु के बजाय कई अंडाणु परिपक्व (mature) हो सकें।
  2. अंडाणु संग्रहण (Egg retrieval) — अंडाणुओं को एक छोटी प्रक्रिया के जरिए निकाला जाता है, जिसे आमतौर पर सिडेशन (sedation) के तहत किया जाता है।
  3. लैब में निषेचन (Fertilisation in the lab)एम्ब्रियोलॉजी लैब (embryology laboratory) में, अंडाणु और शुक्राणु को एक साथ रखा जाता है, या तो तैयार किए गए शुक्राणुओं को हर अंडाणु के आसपास रखकर (conventional IVF) या एक अकेले शुक्राणु को सीधे अंडाणु में इंजेक्ट करके (ICSI)।
  4. भ्रूण का विकास (Embryo culture) — निषेचित अंडाणुओं को इनक्यूबेटर में कुछ दिनों तक बढ़ने दिया जाता है, जो आमतौर पर दिन 3 या दिन 5 तक होता है। यह प्रोटोकॉल और भ्रूण के विकास पर निर्भर करता है।
  5. भ्रूण स्थानांतरण (Embryo transfer) — एक भ्रूण (कभी-कभी क्लिनिकल फैसले के आधार पर दो) को एक छोटी ओपीडी (outpatient) प्रक्रिया में गर्भाशय (uterus) में रखा जाता है।
  6. प्रेग्नेंसी टेस्ट (Pregnancy test) — करीब दो हफ्ते बाद बीटा-एचसीजी (beta-hCG) ब्लड टेस्ट से पता चलता है कि गर्भावस्था (pregnancy) शुरू हुई है या नहीं।

भ्रूण स्थानांतरण से यह गारंटी नहीं मिलती कि भ्रूण गर्भाशय में स्थापित (implant) हो ही जाएगा। अगर यह सफलतापूर्वक स्थापित हो जाता है, तो गर्भावस्था गर्भाशय में उसी तरह विकसित होती है जैसे किसी भी अन्य गर्भावस्था में होती है — हालांकि फर्टिलिटी उपचार के बाद होने वाली गर्भावस्था में कभी-कभी अधिक निगरानी (monitoring) की आवश्यकता होती है, जिसके बारे में आपके ऑब्स्टेट्रिशियन (obstetrician) आपको सलाह देंगे।

आईवीएफ का मतलब क्या होता है (ivf full form in hindi)

IVF का फुल फॉर्म इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (in vitro fertilisation) होता है। "इन विट्रो" लैटिन भाषा का शब्द है जिसका मतलब है "कांच में" — यानी शरीर के अंदर नहीं, बल्कि प्रयोगशाला की डिश में। "फर्टिलाइजेशन" का मतलब है शुक्राणु (sperm) और अंडाणु (egg) का मिलना। इसलिए सीधे शब्दों में कहें तो इसका मतलब है प्रयोगशाला में अंडाणु और शुक्राणु का निषेचन — जो शरीर के बाहर किया जाता है।

यह शब्द, "कांच में," वहीं से आया है जहाँ से लोकप्रिय नाम "टेस्ट ट्यूब बेबी" निकला — और यहीं से परिवारों में सबसे बड़ी गलतफहमी भी शुरू होती है।

टेस्ट ट्यूब बेबी का मतलब क्या होता है?

"टेस्ट ट्यूब बेबी" आईवीएफ के जरिए होने वाले बच्चे का लोकप्रिय नाम है। अलग से कोई "टेस्ट ट्यूब बेबी" की प्रक्रिया नहीं होती जो आईवीएफ से अलग, बेहतर या सस्ती हो। आईवीएफ मेडिकल शब्द है; टेस्ट ट्यूब बेबी इसके परिणाम का रोजमर्रा का नाम है।

दो बातें स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है, क्योंकि लगभग हर पहली कंसल्टेशन में परिवार यह सवाल पूछते हैं:

  • बच्चा किसी ट्यूब, कांच, या मशीन में बड़ा नहीं होता। केवल निषेचन और भ्रूण के विकास के पहले कुछ दिन प्रयोगशाला (lab) में होते हैं। एक बार जब भ्रूण गर्भाशय में स्थानांतरित हो जाता है और स्थापित हो जाता है, तो पूरी गर्भावस्था गर्भाशय में ही पलती है।
  • किसके जेनेटिक मटेरियल का इस्तेमाल होता है, यह आपके प्लान पर निर्भर करता है। जब पति-पत्नी के खुद के अंडाणु और शुक्राणु इस्तेमाल होते हैं, तो भ्रूण में उनका ही जेनेटिक मटेरियल होता है। अगर डोनर (दाता) अंडाणु या डोनर शुक्राणु का इस्तेमाल किया जाता है, तो जेनेटिक योगदान तदनुसार बदल जाता है — जो कि कानूनी पितृत्व/मातृत्व से अलग मामला है। ART (Regulation) Act, 2021 के अनुसार, डोनर अंडाणु या शुक्राणु (gametes) केवल एक पंजीकृत ART बैंक के माध्यम से, लिखित सूचित सहमति (informed consent) के साथ प्राप्त किए जा सकते हैं।

अगर कोई केंद्र (centre) आपको बताता है कि "टेस्ट ट्यूब बेबी" आईवीएफ से अलग या अधिक एडवांस्ड इलाज है और उसका अलग दाम बताता है, तो उनसे क्लिनिकल अंतर लिखित में बताने के लिए कहें।

बच्चा नहीं हो रहा क्या करें — बांझपन का इलाज

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा बांझपन (infertility) को ऐसे परिभाषित किया गया है: लगातार 12 महीने या उससे अधिक समय तक बिना सुरक्षा (unprotected) के संबंध बनाने के बाद भी गर्भधारण (pregnancy) न हो पाना।

इसके अलावा, प्रोफेशनल गाइडेंस (ASRM) सिफारिश करता है कि अगर महिला की उम्र 35 वर्ष या उससे अधिक है, तो जांच पहले — लगभग 6 महीने में — शुरू करनी चाहिए, क्योंकि उस उम्र में समय ज्यादा मायने रखता है। यह केवल जल्दी जांच करने की सिफारिश है, बांझपन की कोई अलग परिभाषा नहीं है। यदि पहले से ज्ञात जोखिम कारक (risk factors) हैं, तो आपने कितने समय तक प्रयास किया है इस बात की परवाह किए बिना तुरंत मूल्यांकन (evaluation) शुरू किया जाना चाहिए। जैसे: मासिक धर्म (periods) न आना या बहुत अनियमित होना, फैलोपियन ट्यूब की ज्ञात बीमारी, पिछली पेल्विक सर्जरी या संक्रमण, एंडोमेट्रियोसिस, अनडिसेंडेड टेस्टेस (undescended testes) या पिछली अंडकोष सर्जरी, या बार-बार गर्भपात (miscarriage) होना।

दो स्पष्टीकरण जो परिभाषा से ज्यादा मायने रखते हैं:

  • बांझपन (infertility) कोई अंतिम फैसला नहीं है। यह जांच करने का एक संकेत है। जो जोड़े परिभाषा के दायरे में आते हैं, उनमें से कई माता-पिता बन जाते हैं जब किसी ऐसी समस्या का पता चलता है जिसका इलाज मुमकिन हो — जैसे अनियमित ओव्यूलेशन, थायराइड की असामान्यता, या कम शुक्राणु संख्या का इलाज योग्य कारण।
  • बांझपन सिर्फ महिला की समस्या नहीं है। NHS के अनुसार बांझपन लगभग एक तिहाई मामलों में पुरुष कारक से, एक तिहाई में महिला कारक से, और बाकी में दोनों भागीदारों या किसी अज्ञात कारण से होता है। यही वजह है कि एक उचित वर्कअप (जांच) में हमेशा दोनों भागीदारों की जांच होती है। एक सीमेन एनालिसिस (semen analysis) एक सरल, गैर-इनवेसिव टेस्ट है और इसे तब तक कभी नहीं टाला जाना चाहिए जब तक पत्नी महीनों तक अकेले जांच से गुजरती रहे।

अगर आप यह ढूंढ रहे हैं कि बच्चा नहीं हो रहा क्या करें, तो पहला कदम आईवीएफ नहीं है। पहला कदम दोनों भागीदारों का मूल्यांकन है। उन स्थितियों के बारे में पढ़ें जहां आपको 12 महीने बिल्कुल इंतजार नहीं करना चाहिए: फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से कब मिलें

IVF की जरूरत कब पड़ती है

ज्यादातर जोड़ों के लिए आईवीएफ पहला इलाज नहीं होता। इस पर तब विचार किया जाता है जब कोई विशिष्ट बाधा (barrier) प्राकृतिक गर्भधारण या सरल इलाज को सफल होने से रोकती है। यह फैसला हमेशा हर व्यक्ति के लिए अलग होता है — नीचे दी गई टेबल इसके कारण बताती है, कोई नियम नहीं।

स्थिति (Situation) आईवीएफ पर विचार क्यों किया जा सकता है
बंद फैलोपियन ट्यूब (Blocked fallopian tubes) अंडाणु और शुक्राणु शरीर के अंदर नहीं मिल सकते; आईवीएफ ट्यूब्स को बायपास करता है
गंभीर पुरुष कारक (male factor) — बहुत कम संख्या (count) या गतिशीलता (motility) ICSI एक अकेले शुक्राणु को सीधे अंडाणु में इंजेक्ट करता है
लो AMH (Low AMH) / ओवेरियन रिजर्व कम होना AMH मुख्य रूप से यह अनुमान लगाता है कि अंडाशय उत्तेजना (stimulation) पर कैसी प्रतिक्रिया देंगे और कितने अंडाणु मिल सकते हैं। यह अपने आप में आईवीएफ का कारण नहीं है और यह सीधे तौर पर अंडाणुओं की क्वालिटी नहीं मापता — इसे उम्र, एंट्रल फॉलिकल काउंट (AFC), निदान और पिछले उपचारों के इतिहास के साथ मिलाकर देखा जाता है
एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) या PCOS जहाँ विशिष्ट निदान (diagnosis), महिला की उम्र, और पहले चरण के उचित उपचार (जैसे ओव्यूलेशन इंडक्शन या सर्जरी) की प्रतिक्रिया यह संकेत दे — यह स्वतः (automatically) नहीं होता
अनएक्सप्लेंड इनफर्टिलिटी (Unexplained infertility) कई IUI चक्रों के बाद आईवीएफ वह जानकारी देता है (निषेचन और भ्रूण का विकास) जो IUI नहीं दे सकता, और यह निश्चित संख्या में IUI प्रयासों के बाद एक विकल्प है
माता-पिता में ज्ञात क्रोमोसोमल या आनुवंशिक असामान्यता के साथ बार-बार गर्भावस्था का नुकसान PGT पर तब चर्चा की जा सकती है जब ऐसी कोई असामान्यता पहचानी गई हो — यह आम तौर पर बार-बार होने वाले गर्भपात के लिए नहीं है

अगर इनमें से कोई भी आप पर लागू नहीं होता है, तो एक अच्छा क्लिनिक आपको यह बताएगा और कुछ सरल इलाज शुरू करेगा। दोनों भागीदारों की पूरी जांच के बिना "सीधे आईवीएफ करते हैं" कहा जाना, दूसरी राय (second opinion) लेने का एक कारण है।

आईवीएफ प्रक्रिया (ivf process in hindi)

दवाओं की शुरुआत से लेकर प्रेग्नेंसी टेस्ट तक, एक आईवीएफ चक्र (IVF cycle) आम तौर पर लगभग चार से छह सप्ताह का होता है, हालांकि यह आपके लिए चुने गए प्रोटोकॉल के अनुसार अलग हो सकता है। नीचे दिए गए चरण (stages) और उनका समय रूटीन प्रैक्टिस पर आधारित है और इसे हर मरीज के अनुसार एडजस्ट किया जाता है।

चरण (Stage) क्या होता है आम समय (Typical duration)
1. मूल्यांकन और योजना हार्मोन टेस्ट, AMH, स्कैन, सीमेन एनालिसिस; प्रोटोकॉल तय किया जाता है चक्र शुरू होने से पहले
2. अंडाशय उत्तेजना (Ovarian stimulation) रोज हार्मोन इंजेक्शन (hormone injections) ताकि कई फॉलिकल्स (follicles) बढ़ सकें आम तौर पर लगभग 9–12 दिन; प्रोटोकॉल पर निर्भर
3. फॉलिकुलर मॉनिटरिंग (Follicular monitoring) फॉलिकल की वृद्धि को ट्रैक करने और दवा की डोज़ एडजस्ट करने के लिए स्कैन, आमतौर पर हर कुछ दिनों में उत्तेजना (stimulation) के दौरान
4. ट्रिगर इंजेक्शन अंडाणुओं को परिपक्व (mature) करने के लिए अंतिम इंजेक्शन अंडाणु संग्रहण से एक निश्चित समय पहले दिया जाता है, आम तौर पर 34–36 घंटे पहले
5. अंडाणु संग्रहण (Egg retrieval) अल्ट्रासाउंड के मार्गदर्शन में योनि (vagina) के रास्ते अंडाणु निकाले जाते हैं, आमतौर पर सिडेशन (sedation) के तहत एक छोटी प्रक्रिया; ज्यादातर मरीज उसी दिन घर चले जाते हैं
6. शुक्राणु देना और तैयार करना अंडाणु निकालने वाले दिन ही सैंपल दिया जाता है और लैब में तैयार किया जाता है उसी दिन
7. निषेचन (Fertilisation) — IVF या ICSI अंडाणु और शुक्राणु को लैब में मिलाया जाता है उसी दिन
8. भ्रूण का विकास (Embryo culture) भ्रूण को इनक्यूबेटर में बढ़ने दिया जाता है, आमतौर पर दिन 3 या दिन 5 ब्लास्टोसिस्ट (Day 5 blastocyst) तक कुछ दिन, विकास के आधार पर
9. भ्रूण स्थानांतरण (Embryo transfer) एक पतले कैथेटर के जरिए भ्रूण को गर्भाशय में रखा जाता है एक छोटी ओपीडी (outpatient) प्रक्रिया; आमतौर पर किसी एनेस्थीसिया की आवश्यकता नहीं होती, हालांकि कुछ मरीजों को थोड़ी असुविधा हो सकती है
10. ल्यूटियल सपोर्ट और इंतजार प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) सपोर्ट, फिर बीटा-एचसीजी ब्लड टेस्ट टेस्ट की तारीख आपका क्लिनिक तय करता है, आमतौर पर ट्रांसफर के 10–14 दिन बाद

दो व्यावहारिक बातें जो परिवारों को पहले से कम ही सुनने को मिलती हैं। पहली, चरण 3 ही आपकी यात्रा (travel) को तय करता है: लगभग दो हफ्तों में होने वाले बार-बार के मॉनिटरिंग स्कैन ही वह कारण हैं जिससे दूर के क्लिनिक में जाना मुश्किल हो जाता है। दूसरी बात, अगर ट्रांसफर के बाद भ्रूण बच जाते हैं, तो उन्हें फ्रीज किया जा सकता है और बाद में फ्रोजन एम्ब्रियो ट्रांसफर (frozen embryo transfer) में इस्तेमाल किया जा सकता है — यह एक हल्का चक्र होता है जिसमें उत्तेजना के इंजेक्शन नहीं होते हैं।

हर दिन के हिसाब से प्रक्रिया जानने के लिए, आपका पहला आईवीएफ चक्र, सप्ताह-दर-सप्ताह टाइमलाइन पढ़ें।

आईयूआई क्या है और आईसीएसआई क्या है

ये तीन शब्द अक्सर बातचीत में एक-दूसरे की जगह इस्तेमाल होते हैं, लेकिन ये एक ही चीज नहीं हैं।

  • आईयूआई क्या है (IUI): इंट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन (Intrauterine insemination) — इसमें तैयार किए गए शुक्राणुओं को ओव्यूलेशन के समय सीधे गर्भाशय (uterus) में डाल दिया जाता है। निषेचन (fertilisation) अभी भी शरीर के अंदर ही होता है। यह सरल है और इसका खर्च बहुत कम है, और इसके लिए कम से कम एक खुली फैलोपियन ट्यूब और पर्याप्त शुक्राणु मापदंड (sperm parameters) की आवश्यकता होती है। IUI ट्रीटमेंट देखें।
  • आईवीएफ (IVF): अंडाणुओं और शुक्राणुओं को लैब में मिलाया जाता है, और एक भ्रूण गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है।
  • आईसीएसआई क्या है (ICSI): यह आईवीएफ का एक प्रकार है, उसका विकल्प नहीं। माइक्रोस्कोप के नीचे एक अकेले शुक्राणु को एक अंडाणु के अंदर इंजेक्ट किया जाता है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से गंभीर पुरुष कारक (severe male factor), सर्जरी द्वारा निकाले गए शुक्राणु, या पिछले आईवीएफ में निषेचन न हो पाने (fertilisation failure) की स्थिति में किया जाता है। देखें ICSI vs IVF: ICSI की जरूरत कब होती है

अगर कोई आपको आईवीएफ का खर्च बताता है लेकिन यह नहीं बताता कि उसमें ICSI शामिल है या नहीं, तो वह नंबर अधूरा है।

आईवीएफ ट्रीटमेंट में कितना खर्चा आता है (आईवीएफ खर्च)

खर्च (cost) वह सवाल है जो परिवार सबसे पहले पूछते हैं और क्लिनिक अक्सर सबसे आखिर में बताते हैं। नीचे दिए गए खर्च के आंकड़े हमारे खुद के पब्लिश किए हुए बैंड हैं — ये वही आंकड़े हैं जो हमारे खर्च और EMI पेज पर हैं। ये सांकेतिक (indicative) हैं, बदलाव के अधीन हैं, और आपका सटीक खर्च आपकी जांच (evaluation) के बाद लिखित में पक्का किया जाता है। हम अन्य केंद्रों की कीमतों को प्रकाशित नहीं करते या उन पर टिप्पणी नहीं करते।

उपचार (Treatment) अंश (Aansh) में अनुमानित खर्च (Cost band)
IUI, प्रति चक्र ₹5,000 – ₹10,000 (दवाइयां अलग से)
IVF, एक पूरा चक्र ₹1,20,000 – ₹2,40,000
डोनर-एग (Donor-egg) IVF ऐड-ऑन बेस IVF के ऊपर +₹80,000 – ₹1,20,000
एग फ्रीजिंग (चक्र) ₹1,00,000 (क्रायोस्टोरेज अलग से)
क्रायोस्टोरेज (Cryostorage) ~₹1,000 प्रति माह प्रति स्ट्रॉ (straw)

अलग-अलग डायग्नोस्टिक या सर्जिकल प्रक्रियाएं, जहां क्लिनिकल रूप से आवश्यक हों, उनका खर्च अलग से बताया जाता है: लैप्रोस्कोपी (laparoscopy) ₹10,000–₹15,000 और हिस्टेरोस्कोपी (hysteroscopy) ₹20,000–₹25,000। ये रूटीन आईवीएफ चक्र का हिस्सा नहीं हैं।

आईवीएफ का खर्च बैंड इतना बड़ा क्यों है: आपकी दवाइयों की जरूरत (जो सबसे बड़ा वेरिएबल है और आपकी उम्र और ओवेरियन रिजर्व पर निर्भर करता है), क्या ICSI की जरूरत है, आपकी प्रतिक्रिया के अनुसार कितने मॉनिटरिंग स्कैन चाहिए, और कोई भी ऐड-ऑन (add-on) जैसे PGT। मानक प्रोटोकॉल से अलग दवाइयां और सूचीबद्ध ऐड-ऑन मूल अनुमान (base quote) से बाहर हो सकते हैं। 3–24 महीनों के लिए 0% EMI बहुत कम दस्तावेजों के साथ उपलब्ध है, जो फाइनेंसिंग पार्टनर द्वारा क्रेडिट स्वीकृति के अधीन है।

किसी भी क्लिनिक (हमारे क्लिनिक सहित) में दो बातों पर जोर दें: अपनी जांच के बाद एक लिखित अनुमान (written estimate), और इस बात की साफ लिस्ट कि इसमें क्या शामिल नहीं है। किसी भी चीज़ पर हस्ताक्षर करने से पहले पढ़ें कि आईवीएफ पैकेज में क्या शामिल होता है और छुपे हुए खर्च (hidden costs) कहां होते हैं, और यदि आपको कोई पैकेज डील दी जा रही है तो मल्टी-साइकिल आईवीएफ खर्च कैसे काम करता है

साथ ही, उस खर्च का भी बजट बनाएं जो किसी प्राइस लिस्ट में नहीं होता: सफर, काम से छुट्टी वाले दिन, और अगर क्लिनिक घर से दूर है तो रहने की जगह।

आईवीएफ की सफलता दर कैसे समझें

किसी भी क्लिनिक से सावधान रहें जो "आईवीएफ की सफलता दर कितनी है?" का जवाब एक अकेले आत्मविश्वास भरे प्रतिशत (percentage) के साथ देता है। यहाँ नंबर को सही तरीके से समझने का तरीका दिया गया है।

  • पूछें कि भाजक (denominator) क्या है। "प्रति शुरू किया गया चक्र (per cycle started)," "प्रति अंडाणु संग्रहण (per egg retrieval)," और "प्रति भ्रूण स्थानांतरण (per embryo transfer)" अलग-अलग भाजक हैं और एक ही डेटा से अलग-अलग प्रतिशत देते हैं। ट्रांसफर के आधार पर बताई गई दर उन सभी चक्रों को हटा देती है जो कभी ट्रांसफर तक पहुंचे ही नहीं। CDC की ART रिपोर्टिंग इन भाजकों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करती है, और किसी भी क्लिनिक को यह बताने में सक्षम होना चाहिए कि वह किसका उपयोग कर रहा है।
  • पूछें कि एंडपॉइंट (endpoint) क्या है। प्रेग्नेंसी रेट, लाइव बर्थ रेट (जीवित जन्म दर) नहीं है। ज्यादातर मरीज सफलता दर से लाइव बर्थ रेट ही जानना चाहते हैं।
  • संचयी दरों (Cumulative rates) के लिए तीन विवरण चाहिए। एक संचयी (cumulative) आंकड़ा एक से अधिक ट्रांसफर के परिणामों को जोड़कर बताता है — जिसमें अक्सर एक ही अंडाणु संग्रहण से बचे हुए फ्रोजन भ्रूण शामिल होते हैं। इसे तभी समझा जा सकता है जब एंडपॉइंट, भाजक (denominator), और फॉलो-अप का समय सीमा (window) स्पष्ट रूप से बताई जाए।
  • उम्र एक महत्वपूर्ण कारक है (जब मरीज के खुद के अंडाणुओं का उपयोग होता है) — लेकिन यह एकमात्र कारक नहीं है। निदान (diagnosis), ओवेरियन रिस्पांस, भ्रूण का विकास, पिछला उपचार इतिहास और परिणाम की परिभाषा भी मायने रखती है। इसलिए एक क्लिनिक का समग्र (overall) औसत आपको आपकी स्थिति के बारे में बहुत कम जानकारी देता है; अपने आयु वर्ग (age band) और अपने निदान के लिए आंकड़े पूछें। आईवीएफ की सफलता और उम्र: यथार्थवादी उम्मीदें देखें।
  • किसी भी क्लिनिक की सफलता दर 100% नहीं होती। सफलता की कोई भी गारंटी एक मार्केटिंग दावा है, क्लिनिकल दावा नहीं — पढ़ें क्या आईवीएफ 100% सफल है?

आपको बताए गए किसी भी आंकड़े से सवाल करने के लिए व्यावहारिक गाइड आईवीएफ सफलता दर के दावे को कैसे पढ़ें है। वे सवाल हमारे पास भी लाएं।

आईवीएफ उपचार के दुष्प्रभाव

आईवीएफ को आमतौर पर शरीर आसानी से सह लेता है, लेकिन आपको इसकी एक ईमानदार तस्वीर जानने का हक है। नीचे दिए गए प्रभावों (effects) को दो भागों में बांटा गया है: अस्थाई प्रभाव जिनकी उम्मीद की जाती है, और असामान्य जटिलताएं (uncommon complications)।

उपचार के दौरान अस्थाई प्रभाव

  • इंजेक्शन। यह बारीक सुई के साथ त्वचा के नीचे (subcutaneously) दिए जाते हैं, आमतौर पर पेट पर। बहुत से मरीज या उनके पार्टनर इन्हें घर पर लगाना सीख लेते हैं। इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द या नीला निशान (bruising) हो सकता है।
  • उत्तेजना (stimulation) के दौरान। जैसे-जैसे कई फॉलिकल्स बढ़ते हैं और एस्ट्रोजन का स्तर (oestrogen levels) बढ़ता है, पेट फूलना (bloating), भारीपन, स्तनों में कोमलता और मूड में बदलाव हो सकते हैं।
  • अंडाणु संग्रहण (egg retrieval) के बाद। एक या दो दिन तक हल्की ऐंठन (cramping) और योनि से हल्का खून आना (spotting) हो सकता है। अंडाणु निकालने की प्रक्रिया आमतौर पर सिडेशन (sedation) के तहत की जाती है, हालांकि इसके बाद होने वाली असुविधा (discomfort) हर मरीज में अलग-अलग हो सकती है।

असामान्य जटिलताएं (Uncommon complications)

  • OHSS (ovarian hyperstimulation syndrome). अंडाशय (ovaries) की अत्यधिक प्रतिक्रिया जिससे शरीर में तरल पदार्थ जमा हो जाता है (fluid shifts), पेट बहुत ज्यादा फूल जाता है और गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। आधुनिक एंटागोनिस्ट (antagonist) प्रोटोकॉल, ओवेरियन रिजर्व मार्कर और फॉलिकल काउंट के आधार पर डोज़ एडजस्टमेंट, अधिक प्रतिक्रिया देने वालों के लिए वैकल्पिक ट्रिगर दवा, और 'फ्रीज-ऑल' (freeze-all) रणनीतियों का उपयोग विशेष रूप से इस जोखिम को कम करने के लिए किया जाता है। PCOS वाली महिलाओं को इसका अधिक जोखिम होता है और उसी के अनुसार उनकी निगरानी की जाती है।
  • अंडाणु संग्रहण (egg retrieval) के प्रक्रियात्मक जोखिम, जिसमें रक्तस्राव (bleeding) और संक्रमण (infection) शामिल हैं।
  • एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (Ectopic pregnancy)। भ्रूण स्थानांतरण के बाद भी कोई गर्भावस्था गर्भाशय के बाहर स्थापित (implant) हो सकती है, जो एक कारण है कि पॉजिटिव टेस्ट के बाद शुरुआती स्कैन बहुत महत्वपूर्ण होता है।
  • मल्टीपल प्रेग्नेंसी (Multiple pregnancy)। एक से अधिक भ्रूण ट्रांसफर करने से जुड़वां (twins) बच्चों की संभावना बढ़ जाती है, जिससे माँ और बच्चों के लिए वास्तविक जोखिम बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि क्लिनिकल रूप से उचित होने पर सिंगल एम्ब्रियो ट्रांसफर (single embryo transfer) को प्राथमिकता दी जाती है।
  • भावनात्मक भार (The emotional load)। यह कम चर्चित है और बहुत से जोड़ों के लिए सबसे कठिन हिस्सा है — खासकर ट्रांसफर के बाद का इंतजार और नेगेटिव परिणाम आने की संभावना।

अगर आपको पेट में तेज दर्द, तेजी से वजन बढ़ना, सांस लेने में तकलीफ, पेशाब कम आना, भारी रक्तस्राव, या बुखार हो, तो अपनी अगली अपॉइंटमेंट का इंतजार न करें, बल्कि तुरंत अपने क्लिनिक से संपर्क करें।

क्या चंद्रपुर में आईवीएफ उपचार उपलब्ध है?

जी हाँ। अंश हॉस्पिटल एंड आईवीएफ सेंटर (Aansh Hospital & IVF Center) चंद्रपुर में अपनी एम्ब्रियोलॉजी लैब (embryology lab) के साथ सरकार द्वारा पंजीकृत लेवल-2 एआरटी क्लिनिक (Reg. No. MH/AC/2024/15441/L2/Chandrapur/132) चलाता है। अंडाणु संग्रहण, निषेचन, भ्रूण का विकास और भ्रूण स्थानांतरण, यह सब हमारे अपने परिसर में किया जाता है।

एक ऑन-साइट (on-site) लैब व्यावहारिक रूप से क्यों मायने रखती है:

  • मॉनिटरिंग आईवीएफ चक्र का वास्तविक भार है। अंडाशय उत्तेजना (stimulation) के लिए लगभग दो हफ्तों में बार-बार स्कैन की आवश्यकता होती है। जहां क्लिनिक दूसरे शहर में होता है, वहां हर एक विजिट का मतलब लंबा सफर, यात्रा का खर्च, और आमतौर पर काम से छुट्टी लेना होता है। चंद्रपुर जिले के परिवारों के लिए, स्थानीय स्तर पर इलाज कराने से यह सब बच जाता है।
  • कम हैंडओवर (handovers)। अंडाणु और भ्रूण हर उस जगह समय और तापमान के प्रति संवेदनशील होते हैं जहां उन्हें संभाला या ले जाया जाता है। जब अंडाणु निकालना और लैब एक ही परिसर में होते हैं, तो वह कदम आपके चक्र का हिस्सा नहीं रहता। पढ़ें क्यों एक ऑन-साइट आईवीएफ लैब महत्वपूर्ण है
  • निरंतर देखभाल (Continuity of care)। डॉ. श्वेता अग्रवाल आपका मूल्यांकन, चक्र की योजना और प्रक्रियाएं संभालती हैं — आपको अलग-अलग साइट्स पर अलग-अलग डॉक्टरों के बीच नहीं भेजा जाता।
  • हिंदी में कंसल्टेशन। आप अपना हर सवाल अपनी भाषा में पूछ सकते हैं और आपको जवाब भी उसी में मिलेगा। आपके इलाज में आपकी अंग्रेजी का कोई असर नहीं होना चाहिए।

यात्रा करना कभी-कभी सही फैसला होता है — किसी बहुत ही विशेषज्ञ प्रक्रिया के लिए, या एक विशिष्ट दूसरी राय (second opinion) के लिए। दोनों तरफ की ईमानदार तुलना के लिए, आईवीएफ चंद्रपुर में बनाम नागपुर की यात्रा और चंद्रपुर लॉजिस्टिक्स गाइड पढ़ें। अगर आप नागपुर के केंद्रों के खर्च की तुलना कर रहे हैं, तो नागपुर में आईवीएफ का खर्च: मरीज वास्तव में क्या भुगतान करते हैं देखें।


आगे क्या करें

अगर आप एक साल या उससे अधिक समय से कोशिश कर रहे हैं — या लगभग छह महीने से, अगर पत्नी की उम्र 35 या उससे अधिक है — तो अगला कदम दोनों भागीदारों का मूल्यांकन है, आईवीएफ के बारे में निर्णय लेना नहीं।

  • किसी अन्य जगह दिए गए प्लान पर मुफ्त दूसरी राय (free second opinion) लें।
  • अपनी कंसल्टेशन से पहले आईवीएफ खर्च और 0% EMI की जानकारी देखें ताकि आप सटीक सवाल पूछ सकें।
  • अपनी पुरानी रिपोर्ट्स साथ लाएं — सीमेन एनालिसिस, AMH, HSG, पिछले चक्र की समरी।

अपनी स्थिति पर चर्चा करने के लिए: WhatsApp करें +91 80056 85160 पर या कॉल करें +91 80056 85160 पर। अंश हॉस्पिटल एंड आईवीएफ सेंटर, चंद्रपुर।


जानने योग्य

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आईवीएफ का मतलब क्या होता है?
IVF का मतलब इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (in vitro fertilisation) है — "कांच में निषेचन," जिसका मतलब शरीर के अंदर के बजाय प्रयोगशाला (lab) की डिश में निषेचन (fertilisation) होना है। अंडाणु (egg) और शुक्राणु (sperm) को प्रयोगशाला में मिलाया जाता है, उससे बने भ्रूण को कुछ दिनों तक विकसित किया जाता है, और फिर इसे गर्भाशय (uterus) में रखा जाता है।
टेस्ट ट्यूब बेबी कैसे होता है (टेस्ट ट्यूब बेबी की प्रक्रिया)?
प्रोटोकॉल के आधार पर यह प्रक्रिया चरणों में लगभग चार से छह सप्ताह तक चलती है: मूल्यांकन (evaluation); रोज़ उत्तेजना (stimulation) वाले इंजेक्शन, आम तौर पर लगभग 9–12 दिनों के लिए; हर कुछ दिनों में मॉनिटरिंग स्कैन; अंडाणु निकालने से एक निश्चित समय पहले एक ट्रिगर इंजेक्शन; आमतौर पर सिडेशन के तहत अंडाणु संग्रहण (egg retrieval); उसी दिन शुक्राणु देना और तैयार करना; पारंपरिक आईवीएफ (IVF) या आईसीएसआई (ICSI) के माध्यम से लैब में निषेचन; कुछ दिनों के लिए भ्रूण का विकास; एक पतले कैथेटर के जरिए भ्रूण स्थानांतरण (embryo transfer); और आपका क्लिनिक जो तारीख तय करता है उस दिन बीटा-एचसीजी ब्लड टेस्ट, आम तौर पर 10–14 दिन बाद।
IVF का खर्च क्या है?
अंश (Aansh) में, एक पूरे आईवीएफ चक्र का खर्च ₹1,20,000–₹2,40,000 है। ये श्रेणियां (ranges) सांकेतिक हैं और बदलाव के अधीन हैं; आपका सटीक खर्च मूल्यांकन के बाद लिखित में पक्का किया जाता है। यह रेंज मुख्य रूप से दवाइयों की जरूरत, ICSI की आवश्यकता है या नहीं, मॉनिटरिंग स्कैन की संख्या, और कोई भी ऐड-ऑन जैसे PGT पर निर्भर करती है — मानक प्रोटोकॉल से अधिक की दवाइयां और सूचीबद्ध ऐड-ऑन मूल अनुमान (base quote) से बाहर हो सकते हैं। आईयूआई (IUI) का खर्च ₹5,000–₹10,000 प्रति चक्र है जिसमें दवाइयां अलग से होती हैं। 3–24 महीनों के लिए 0% EMI उपलब्ध है, जो फाइनेंसिंग पार्टनर द्वारा क्रेडिट स्वीकृति के अधीन है।
टेस्ट ट्यूब बेबी में खर्चा कितना आता है?
आईवीएफ (IVF) के बराबर ही, क्योंकि "टेस्ट ट्यूब बेबी" केवल आईवीएफ के माध्यम से कंसीव किए गए बच्चे का लोकप्रिय नाम है: अंश में ₹1,20,000–₹2,40,000 प्रति पूर्ण चक्र, जिसका पक्का अनुमान जांच के बाद लिखित में दिया जाता है। यदि कोई केंद्र "टेस्ट ट्यूब बेबी" का खर्च "आईवीएफ" से अलग बताता है, तो उनसे लिखित में यह समझाने के लिए कहें कि क्लिनिकल रूप से क्या अलग है — इसकी कोई अलग प्रक्रिया नहीं होती।
क्या टेस्ट ट्यूब बेबी और आईवीएफ एक ही हैं?
"टेस्ट ट्यूब बेबी" की कोई अलग प्रक्रिया नहीं होती। आईवीएफ इलाज का मेडिकल नाम है; "टेस्ट ट्यूब बेबी" इसके जरिए होने वाले बच्चे का लोकप्रिय नाम है। बच्चा किसी टेस्ट ट्यूब में बड़ा नहीं होता — केवल निषेचन और भ्रूण के विकास के पहले कुछ दिन प्रयोगशाला में होते हैं।
आईवीएफ में किसके शुक्राणु (sperm) का इस्तेमाल होता है?
एक मानक चक्र में, पति के खुद के शुक्राणु (sperm) का इस्तेमाल होता है। विशिष्ट परिस्थितियों में डोनर शुक्राणु का इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे कि एज़ूस्पर्मिया (azoospermia) जहां शुक्राणु नहीं मिल पाते या कोई गंभीर आनुवंशिक बीमारी (inheritable condition) होने पर। यह काउंसलिंग और पति-पत्नी की लिखित सूचित सहमति (informed consent) के बाद किया जाता है। ART (Regulation) Act, 2021 के तहत, डोनर अंडाणु या शुक्राणु (gametes) केवल पंजीकृत ART बैंक के माध्यम से प्राप्त किए जा सकते हैं, जिसमें डोनर की जांच और रिकॉर्ड रखना कानून द्वारा निर्धारित है।
बांझपन की मेडिकल परिभाषा क्या है और जांच कब करानी चाहिए?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) बांझपन को 12 महीने या उससे अधिक समय तक नियमित, असुरक्षित संबंध बनाने के बाद भी गर्भधारण न होने के रूप में परिभाषित करता है। इसके अलावा, ASRM गाइडेंस सिफारिश करता है कि यदि महिला की उम्र 35 वर्ष या अधिक है, तो मूल्यांकन लगभग 6 महीने में शुरू किया जाना चाहिए। यदि ज्ञात जोखिम कारक (risk factors) हैं जैसे कि मासिक धर्म (periods) न आना या बहुत अनियमित होना, फैलोपियन ट्यूब की ज्ञात बीमारी, पिछली पेल्विक सर्जरी या संक्रमण, एंडोमेट्रियोसिस, अनडिसेंडेड टेस्टेस (undescended testes) या पिछली अंडकोष सर्जरी, या बार-बार गर्भपात, तो समय की परवाह किए बिना तुरंत जांच शुरू करनी चाहिए।
गर्भधारण न होने के कारण क्या हैं?
महिला की ओर से: ओव्यूलेशन संबंधी विकार (ovulation disorders) जिसमें PCOS शामिल है, बंद फैलोपियन ट्यूब, एंडोमेट्रियोसिस, गर्भाशय की स्थितियां जैसे फाइब्रॉएड (fibroids) या एडहेसन्स (adhesions), और उम्र से संबंधित अंडाणुओं की मात्रा और गुणवत्ता (quality) में कमी। पुरुष की ओर से: कम शुक्राणु संख्या (low sperm count), खराब गतिशीलता (motility), असामान्य आकार (morphology), वैरीकोसेल (varicocele), हार्मोनल समस्याएं, और रुकावट (obstruction)। कुछ जोड़ों में किसी कारण की पहचान नहीं हो पाती है — इसे अनएक्सप्लेंड इनफर्टिलिटी (unexplained infertility) कहा जाता है। दोनों भागीदारों का परीक्षण किया जाना चाहिए।
क्या आईवीएफ (IVF) में लड़का या लड़की चुन सकते हैं?
नहीं। PCPNDT Act, 1994 और ART (Regulation) Act, 2021 के तहत भारत में लिंग चयन (sex selection) प्रतिबंधित है, और इसकी पेशकश करना एक अपराध है। भ्रूण का आनुवंशिक परीक्षण (PGT) केवल गंभीर आनुवंशिक बीमारी (genetic disease) की जांच के लिए किया जाता है, जहां क्लिनिकल रूप से यह आवश्यक हो; कानून लिंग से जुड़े विकारों (sex-linked disorders) की पहचान करने की संकीर्ण (narrow) छूट केवल ऐसे विकार के निदान, रोकथाम या उपचार के उद्देश्य से देता है — कभी भी बच्चे का लिंग चुनने के लिए नहीं।
आईवीएफ उपचार के दुष्प्रभाव क्या हैं?
अस्थायी प्रभावों में उत्तेजना (stimulation) के दौरान पेट फूलना (bloating), भारीपन, स्तनों में कोमलता और मूड में बदलाव, इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द और सूजन, और अंडाणु निकालने के बाद एक या दो दिन तक ऐंठन या हल्का खून आना (spotting) शामिल हो सकता है। असामान्य जटिलताओं (Uncommon complications) में ओवेरियन हाइपरस्टिम्युलेशन सिंड्रोम (OHSS), अंडाणु निकालने के बाद रक्तस्राव या संक्रमण, और एक्टोपिक प्रेग्नेंसी शामिल हैं। एक से अधिक भ्रूण ट्रांसफर करने से मल्टीपल प्रेग्नेंसी (जुड़वां बच्चों) का जोखिम बढ़ जाता है, यही कारण है कि क्लिनिकल रूप से उचित होने पर सिंगल एम्ब्रियो ट्रांसफर (single embryo transfer) को प्राथमिकता दी जाती है। अगर आपको पेट में तेज दर्द, तेजी से वजन बढ़ना, सांस फूलना, पेशाब कम आना, भारी रक्तस्राव या बुखार हो, तो तुरंत अपने क्लिनिक से संपर्क करें।
क्या चंद्रपुर में आईवीएफ उपचार उपलब्ध है, या नागपूर/पुणे जाना पड़ता है?
यह चंद्रपुर में उपलब्ध है। अंश हॉस्पिटल एंड आईवीएफ सेंटर (Aansh Hospital & IVF Center) के पास एक सरकारी लेवल-2 एआरटी पंजीकरण (MH/AC/2024/15441/L2/Chandrapur/132) है और इसके परिसर में अपनी एम्ब्रियोलॉजी लैब है, इसलिए अंडाणु संग्रहण (egg retrieval), निषेचन, भ्रूण का विकास और ट्रांसफर सभी वहीं किए जाते हैं। उत्तेजना (stimulation) के दौरान यह सबसे ज्यादा मायने रखता है, जब लगभग दो हफ्तों तक बार-बार मॉनिटरिंग स्कैन की आवश्यकता होती है — एक ऐसा चरण जो किसी दूसरे शहर से कर पाना बहुत मुश्किल होता है।
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