डॉ. श्वेता अग्रवाल, MBBS, DGO द्वारा Medically reviewed by Dr. Shweta Agarwal, MBBS, DGO Last updated: June 2026
इस पेज पर दी गई जानकारी केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है और इसे डॉक्टर की सलाह का विकल्प न माना जाए। उपचार के परिणाम हर मरीज की व्यक्तिगत क्लिनिकल स्थिति पर निर्भर करते हैं।
आंश हॉस्पिटल एंड आईवीएफ सेंटर (Aansh Hospital & IVF Center) एक सरकारी पंजीकृत लेवल-2 एआरटी क्लिनिक (Reg. No. MH/AC/2024/15441/L2/Chandrapur/132) है। यह विदर्भ और उत्तरी तेलंगाना में सेवा देने वाले फर्टिलिटी केंद्रों के एक बढ़ते नेटवर्क का हिस्सा है — किसी चेन के विपरीत, जहां हर सेंटर के डॉक्टर स्वतंत्र रूप से निर्णय लेते हैं, हर साइकिल का अंतिम उपचार-निर्णय हर लोकेशन पर डॉ. श्वेता अग्रवाल का ही होता है, जिसका मुख्यालय और अत्याधुनिक इन-हाउस एम्ब्रियोलॉजी लैब चंद्रपुर में स्थित है। हमारा सरकारी ART रजिस्ट्रेशन सभी विनियमित (regulated) फर्टिलिटी डायग्नोस्टिक और उपचार सेवाओं को कवर करता है।
पुरुष बांझपन (Male fertility) रीप्रोडक्टिव मेडिसिन के सबसे अधिक भ्रम और मिथकों से घिरे क्षेत्रों में से एक है। इनमें से कुछ मिथक संकोच, शर्म और इस विषय पर खुलकर बात न करने की झिझक के कारण पैदा होते हैं। कुछ मिथक उन पुरानी धारणाओं से आते हैं जिन्हें दशकों के क्लिनिकल रिसर्च ने गलत साबित कर दिया है। वहीं, कुछ केवल पारंपरिक मान्यताएं हैं जो इसलिए बनी हुई हैं क्योंकि किसी ने सरल शब्दों में यह नहीं समझाया कि वैज्ञानिक तथ्य असल में क्या कहते हैं।
इस लेख में, मैं अपने क्लिनिक में अक्सर सामने आने वाले कुछ सबसे आम मिथकों के बारे में बात करना चाहती हूँ — बिलकुल उसी तरह जैसे मरीज और उनके परिवार वाले मुझसे पूछते हैं — और उनके पीछे के वैज्ञानिक तथ्यों को आपके सामने रखना चाहती हूँ। हिंदी और मराठी में इसके लिए सबसे आम इस्तेमाल होने वाला शब्द पुरुष बांझपन (purush baanjhpan) है; और इस शब्द के साथ जुड़ा सामाजिक संकोच (stigma) ही वह पहला मिथक है जिसे हमें दूर करने की जरूरत है।
Myth 1: "Infertility is almost always the woman's problem"
तथ्य (Fact): निःसंतानता (infertility) के लगभग आधे मामलों में पुरुष बांझपन (Male factor) मुख्य कारण होता है — या तो प्राथमिक कारण के रूप में या महिला साथी की किसी समस्या के साथ एक सहायक कारक के रूप में।
फर्टिलिटी केयर के क्षेत्र में यह सबसे बड़ा और नुकसानदेह मिथक है, क्योंकि इसके कारण अक्सर महिला साथी को महीनों तक जांच और दर्दनाक इलाजों से गुजरना पड़ता है, जबकि पुरुष साथी की कोई जांच ही नहीं की जाती। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) और दुनिया के अन्य प्रमुख फर्टिलिटी संस्थानों के क्लिनिकल दिशा-निर्देशों के अनुसार, निःसंतानता के लगभग 40–50% मामलों में पुरुष बांझपन ही जिम्मेदार होता है, चाहे वह अकेले हो या महिला साथी की किसी समस्या के साथ। कुछ जोड़ों में दोनों में से किसी भी साथी में कोई कमी नहीं मिलती है, जिसे हम अस्पष्टीकृत बांझपन (unexplained infertility) कहते हैं — लेकिन शुरुआत से ही पुरुष की पूरी जांच कराना भी इस प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है।
सीमेन एनालिसिस (semen analysis) यानी वीर्य की जांच एक बहुत ही सरल और दर्द रहित टेस्ट है। जब कोई जोड़ा काफी समय तक कोशिश करने के बाद भी गर्भधारण नहीं कर पाता है, तो सबसे पहले इसी जांच की सलाह दी जाती है। चिकित्सकीय और व्यावहारिक रूप से यही सही है कि शुरुआत में ही दोनों पार्टनर्स की जांच कर ली जाए, ताकि महीनों बाद किसी बड़ी समस्या का पता चलने जैसी स्थिति से बचा जा सके।
Myth 2: "If a man can have sex and ejaculate normally, his fertility is fine"
तथ्य (Fact): इरेक्शन (erection) और स्खलन (ejaculation) की क्षमता तंत्रिका (neurological) और रक्त वाहिकाओं (vascular) की कार्यप्रणाली पर निर्भर करती है, जो स्पर्म (शुक्राणु) बनने की प्रक्रिया से पूरी तरह अलग है। इसलिए, सामान्य यौन क्षमता से स्पर्म काउंट, उनकी गतिशीलता (motility) या उनके आकार (morphology) के बारे में कुछ भी पता नहीं चलता।
अंडकोष (testes) में स्पर्म बनने का एक चक्र लगभग 70–74 दिनों का होता है। स्पर्म की गुणवत्ता और संख्या मुख्य रूप से अंडकोष की कार्यप्रणाली, हार्मोनल सिग्नल्स, शरीर के तापमान और कई अन्य कारकों पर निर्भर करती है — जिनका यौन क्षमता से कोई सीधा संबंध नहीं होता। एक पुरुष को यौन संबंध बनाने में कोई शारीरिक परेशानी नहीं होने पर भी उसका स्पर्म काउंट बहुत कम हो सकता है, स्पर्म की गतिशीलता शून्य हो सकती है, या वीर्य में स्पर्म पूरी तरह से अनुपस्थित हो सकते हैं।
यही कारण है कि सीमेन एनालिसिस (semen analysis) कराना बहुत जरूरी होता है। शरीर में ऐसा कोई बाहरी लक्षण, शारीरिक बदलाव या यौन क्रिया का कोई पहलू नहीं है जिससे वीर्य की गुणवत्ता का सही अंदाजा लगाया जा सके। स्पर्म की स्थिति जानने का एकमात्र तरीका लैब में माइक्रोस्कोप के नीचे उसकी जांच करना ही है। यह समझना कि सीमेन एनालिसिस में क्या मापा जाता है इस दिशा में पहला सही कदम है।
Myth 3: "Male infertility means he is not masculine / it reflects his virility"
तथ्य (Fact): पुरुष बांझपन एक सामान्य मेडिकल समस्या है। इसका पुरुषत्व, सेक्स की इच्छा (libido), शारीरिक ताकत या मर्दानगी के किसी भी अन्य पहलू से कोई संबंध नहीं है।
स्पर्म का उत्पादन पिट्यूटरी ग्लैंड से निकलने वाले हार्मोन्स (FSH और LH) द्वारा नियंत्रित होता है, जो अंडकोष को स्पर्म बनाने का संकेत देते हैं। इस सिस्टम को प्रभावित करने वाली समस्याएं — जैसे कि क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter syndrome) जैसी आनुवंशिक स्थितियां, हार्मोनल असंतुलन, वेरिकोसील (varicocele), पुराने संक्रमण (infections) या ब्लॉकेज (obstruction) — इनका किसी व्यक्ति के व्यवहार, व्यक्तित्व या मर्दानगी की सामाजिक सोच से कोई लेना-देना नहीं होता।
बांझपन को पुरुषत्व या मर्दानगी से जोड़कर देखना एक सामाजिक रूढ़िवादी सोच है, कोई मेडिकल फैक्ट नहीं। यह सोच बहुत नुकसान पहुंचाती है: इसके डर से पुरुष जांच कराने और इलाज लेने में देरी करते हैं, मन में बेवजह की शर्म और हीनभावना पाल लेते हैं, और आपसी रिश्तों में तनाव पैदा हो जाता है — जबकि असल में यह एक सामान्य और ठीक होने वाली मेडिकल स्थिति हो सकती है। क्लिनिक में मैं हर दिन ऐसे मामले देखती हूँ, और काउंसलिंग के दौरान इस पर चर्चा करना हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है।
एक पुरुष जिसे एजोस्पर्मिया (azoospermia) यानी वीर्य में शुक्राणुओं की कमी (निल स्पर्म) है और उसका टेस्टोस्टेरोन लेवल सामान्य है, उसकी सेक्स ड्राइव और यौन क्षमता सामान्य स्पर्म काउंट वाले पुरुष की तरह ही हो सकती है। ये दोनों पूरी तरह से अलग प्रणालियां हैं। पुरुष बांझपन (Male infertility) एक मेडिकल डायग्नोसिस है, और इसे किसी भी अन्य बीमारी की तरह ही देखा जाना चाहिए — यानी सही जांच, सही सलाह और सही इलाज का तरीका अपनाकर।
Myth 4: "You can tell sperm count from how semen looks — more / thicker / clearer means more sperm"
तथ्य (Fact): वीर्य (semen) का रंग, गाढ़ापन, मात्रा या उसकी बनावट देखकर स्पर्म काउंट, उनकी गतिशीलता या आकार के बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं मिल सकती। इसका पता केवल लैब टेस्ट से ही चल सकता है।
यह मिथक इसलिए बना हुआ है क्योंकि यह सुनने में तार्किक लगता है — कि अगर वीर्य की मात्रा अधिक है, तो उसमें स्पर्म भी ज्यादा होंगे। लेकिन वास्तव में, वीर्य की कुल मात्रा में स्पर्म का हिस्सा बहुत ही छोटा होता है। वीर्य का अधिकांश हिस्सा सेमिनल वेसिकल्स और प्रोस्टेट ग्रंथि द्वारा बनाया जाता है, अंडकोष द्वारा नहीं। इसलिए, एक पुरुष का वीर्य सामान्य मात्रा और रूप में होने पर भी उसमें स्पर्म की संख्या शून्य (azoospermia) हो सकती है, और इसके विपरीत, कम मात्रा वाले वीर्य में भी स्पर्म की संख्या पूरी तरह सामान्य हो सकती है।
यहाँ तक कि बेहद अनुभवी एम्ब्रियोलॉजिस्ट और एंड्रॉजिस्ट भी केवल आंखों से देखकर स्पर्म काउंट का अंदाजा नहीं लगा सकते। इसकी जांच का एकमात्र सही तरीका माइक्रोस्कोप के नीचे हीमोसाइटोमीटर (haemocytometer) या कंप्यूटर-असिस्टेड स्पर्म एनालिसिस (CASA) सिस्टम द्वारा किया जाने वाला टेस्ट है — जो एक मान्यता प्राप्त लैब में सीमेन एनालिसिस (semen analysis) के दौरान किया जाता है।
Myth 5: "Age doesn't affect men the way it affects women"
तथ्य (Fact): पुरुषों की बढ़ती उम्र का भी स्पर्म की गुणवत्ता पर वास्तविक और मापने योग्य प्रभाव पड़ता है — हालांकि यह महिलाओं की तुलना में थोड़ा धीमा और अलग होता है।
महिलाओं की फर्टिलिटी उम्र पर बहुत ज्यादा निर्भर करती है क्योंकि वे जन्म से ही अंडों की एक सीमित संख्या के साथ पैदा होती हैं और समय के साथ यह संख्या कम होती जाती है। इसके विपरीत, पुरुष अपने पूरे जीवनकाल में स्पर्म का उत्पादन करते रहते हैं, इसलिए उम्र का प्रभाव बहुत धीमा और क्रमिक होता है। हालांकि, शोध बताते हैं कि जैसे-जैसे पुरुषों की उम्र बढ़ती है, स्पर्म के डीएनए (DNA) की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, उनका आकार बिगड़ सकता है और स्पर्म डीएनए फ्रेगमेंटेशन (टूट-फूट) की दर भी बढ़ सकती है।
इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि अधिक उम्र में पुरुष पिता नहीं बन सकते — बहुत से लोग प्राकृतिक रूप से या आईवीएफ (IVF) की मदद से पिता बनते हैं। लेकिन इसका मतलब यह जरूर है कि इलाज के दौरान पिता की उम्र भी एक महत्वपूर्ण क्लिनिकल पहलू है, खासकर तब जब बार-बार आईवीएफ फेल हो रहा हो, बार-बार गर्भपात (miscarriage) हो रहा हो, या बांझपन का कोई कारण न मिल रहा हो। ऐसी स्थिति में स्पर्म डीएनए फ्रेगमेंटेशन टेस्ट (sperm DNA fragmentation test) काफी मददगार साबित हो सकता है। इसलिए उम्र और फर्टिलिटी को लेकर होने वाली चर्चा में दोनों पार्टनर्स को शामिल किया जाना चाहिए।
Myth 6: "Tight underwear and laptop heat are the main causes of male infertility"
तथ्य (Fact): अंडकोष में अत्यधिक गर्मी होना एक कारण जरूर है, लेकिन यह एक छोटा और आसानी से सुधारा जाने वाला रिस्क फैक्टर है। पुरुष बांझपन के मुख्य कारण मेडिकल होते हैं — जैसे वेरिकोसील (varicocele), हार्मोनल असंतुलन, आनुवंशिक समस्याएं या ब्लॉकेज — जिन्हें केवल अंडरवियर बदलने से ठीक नहीं किया जा सकता।
अंडकोष (testes) शरीर के बाहर स्क्रोटम (scrotum) में इसलिए होते हैं क्योंकि स्पर्म बनने के लिए शरीर के सामान्य तापमान से थोड़े कम तापमान की आवश्यकता होती है। अंडकोष का तापमान बढ़ने से — चाहे वह किसी भी वजह से हो — स्पर्म का बनना अस्थायी रूप से कम हो सकता है। टाइट अंडरवियर पहनने, लंबे समय तक बैठने, गोद में लैपटॉप रखकर काम करने और गर्म पानी से नहाने से बचने की सलाह इसी वजह से दी जाती है।
हालांकि, हमारे अनुभव में ये लाइफस्टाइल से जुड़े कारक गंभीर बांझपन का मुख्य कारण बहुत कम ही होते हैं। जब मेरे सामने गंभीर ओलिगोस्पर्मिया (oligospermia) या एजोस्पर्मिया वाले मामले आते हैं, तो उनका कारण आमतौर पर वेरिकोसील (अंडकोष की नसों का फूलना, जो एक इलाज योग्य संरचनात्मक कारण है), हार्मोनल गड़बड़ी, आनुवंशिक कारण या ब्लॉकेज होता है — न कि अंडरवियर का चुनाव। लाइफस्टाइल में सुधार करना इलाज के साथ मददगार हो सकता है, लेकिन यह मुख्य मेडिकल जांच का विकल्प नहीं है और न ही इसमें देरी करने का कारण होना चाहिए।
यदि किसी ने आपको बिना किसी सीमेन एनालिसिस या डॉक्टर की सलाह के "बस अंडरवियर बदलने और इंतजार करने" को कहा है, तो यह सलाह अधूरी है। फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से मिलें। पुरुष बांझपन की स्थिति (male infertility conditions) वाले पेज पर इसके सभी कारणों और जांच के तरीकों की विस्तृत जानकारी दी गई है।
Myth 7: "Nothing can be done if sperm count is very low or there are no sperm"
तथ्य (Fact): बहुत कम स्पर्म काउंट होने का मतलब यह नहीं है कि आप पिता नहीं बन सकते। यहाँ तक कि एजोस्पर्मिया (azoospermia) — यानी वीर्य में बिल्कुल स्पर्म न होने पर भी, एडवांस सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल और ICSI की मदद से खुद का जैविक पिता (biological father) बनना संभव है, जो इसके पीछे के मुख्य कारण पर निर्भर करता है।
इस गलतफहमी को दूर करना बहुत जरूरी है, क्योंकि कई बार पुरुष सही जांच से पहले ही निराश होकर उम्मीद छोड़ देते हैं। इलाज का रास्ता पूरी तरह से समस्या के कारण पर निर्भर करता है:
- कम स्पर्म काउंट (oligospermia): गंभीरता और कारण के आधार पर, इलाज के लिए IUI, IVF या ICSI के विकल्प मौजूद हैं। यदि कारण हार्मोनल (जैसे हाइपोगोनैडोट्रोपिक हाइपोगोनैडिज़्म) है, तो कभी-कभी हार्मोन थेरेपी से भी स्पर्म काउंट में काफी सुधार किया जा सकता है।
- ऑब्सट्रक्टिव एजोस्पर्मिया (Obstructive azoospermia): इसमें स्पर्म तो बनते हैं लेकिन रास्ते में रुकावट होने के कारण बाहर नहीं आ पाते। ऐसी स्थिति में, सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल प्रक्रियाओं जैसे — PESA या TESE — की मदद से सीधे एपिडिडिमिस या अंडकोष से स्पर्म निकाले जा सकते हैं और ICSI में उनका उपयोग किया जा सकता है। ऑब्सट्रक्टिव मामलों में स्पर्म मिलने की सफलता दर काफी अच्छी होती है।
- नॉन-ऑब्सट्रक्टिव एजोस्पर्मिया (Non-obstructive azoospermia): इसमें स्पर्म बनने की प्रक्रिया ही कमजोर होती है। माइक्रो-टीईएसई (Micro-TESE) — जो कि एक सूक्ष्म-सर्जिकल प्रक्रिया है, की मदद से अंडकोष के उन हिस्सों से भी स्पर्म ढूंढे जा सकते हैं जहाँ वे बन रहे हों, भले ही सामान्य सीमेन एनालिसिस में वे न दिखें। इसकी संभावना मरीज के आनुवंशिक और हार्मोनल रिपोर्ट पर निर्भर करती है। स्पर्म रिट्रीवल (स्पर्म निकालने) के विकल्प इलाज वाले पेज पर विस्तार से समझाए गए हैं।
उपचार के परिणाम हर मरीज की व्यक्तिगत क्लिनिकल स्थिति पर निर्भर करते हैं और मैं कोई गारंटी नहीं देती। लेकिन पूरी जांच होने से पहले यह मान लेना कि "अब कुछ नहीं हो सकता", चिकित्सकीय रूप से बिल्कुल गलत है।
Myth 8: "Ayurvedic remedies and home treatments reliably cure male infertility"
तथ्य (Fact): वर्तमान में ऐसा कोई वैज्ञानिक या क्लिनिकल सबूत उपलब्ध नहीं है जो यह साबित कर सके कि कोई आयुर्वेदिक दवा, हर्बल सप्लीमेंट या घरेलू उपचार पुरुष बांझपन के मुख्य कारणों — जैसे वेरिकोसील, ऑब्सट्रक्टिव एजोस्पर्मिया, हार्मोनल विफलता या आनुवंशिक स्थितियों को ठीक कर सकता है।
कुछ एंटीऑक्सीडेंट सप्लीमेंट्स पर शोध जरूर किए गए हैं, लेकिन उनके परिणाम भी सीमित रहे हैं। इनका सेवन केवल फर्टिलिटी डॉक्टर की सलाह पर ही किया जाना चाहिए। ये उन अपंजीकृत दवाओं और दावों से बिल्कुल अलग हैं जो बांझपन को पूरी तरह ठीक करने का झूठा वादा करते हैं।
बिना प्रमाणित इलाजों पर भरोसा करने का सबसे बड़ा खतरा यह नहीं है कि वे काम नहीं करते — बल्कि सबसे बड़ा नुकसान समय का होता है। महिलाओं की उम्र बढ़ने के साथ उनके गर्भधारण करने की क्षमता कम होने लगती है (विशेषकर 35 साल की उम्र के बाद)। ऐसे में, बिना जांचे-परखे इलाजों में एक साल बर्बाद कर देना बहुत महंगा पड़ सकता है, जबकि इस दौरान पुरुष की ठीक होने वाली समस्या बिना इलाज के ही रह जाती है। पुरुष बांझपन की शंका होने पर सबसे सही कदम है — सीमेन एनालिसिस कराना और उसके बाद किसी फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से मिलना। एक बार सही निदान (diagnosis) हो जाने के बाद, डॉक्टर की सलाह के साथ अन्य सहायक उपचारों पर चर्चा की जा सकती है।
यदि आप इस तरह के किसी इलाज का उपयोग कर रहे हैं या करने की सोच रहे हैं, तो मैं इसके लिए आपको मना नहीं करती — लेकिन मेरी यह दृढ़ सलाह होगी कि आप पहले एक सीमेन एनालिसिस जरूर करवा लें, ताकि हमें यह पता हो कि असल समस्या क्या है।
The constructive message: what to actually do
यदि आपको या आपके पार्टनर को फर्टिलिटी को लेकर कोई चिंता है — चाहे आप लंबे समय से कोशिश कर रहे हों और सफल नहीं हो पा रहे हों, या बस अपनी फर्टिलिटी की स्थिति जानना चाहते हों — तो वैज्ञानिक रूप से सही रास्ता बहुत सीधा है:
- दोनों पार्टनर्स की एक साथ जांच हो। महिला और पुरुष दोनों की जांच शुरुआत से ही एक साथ होनी चाहिए, न कि एक के बाद एक।
- पुरुष की पहली जांच हमेशा सीमेन एनालिसिस हो। यह एक बहुत ही सरल और नॉन-इनवेसिव जांच है जो एक ही बार में सबसे महत्वपूर्ण जानकारी दे देती है। एक ही अपॉइंटमेंट में दोनों पार्टनर्स की जांच के लिए फर्टिलिटी असेसमेंट (जांच) बुक करें।
- यदि सीमेन एनालिसिस रिपोर्ट असामान्य आती है, तो दोबारा जांच कराएं। केवल एक रिपोर्ट के आधार पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाता। वीर्य की गुणवत्ता समय-समय पर बदल सकती है।
- रिपोर्ट के निष्कर्ष के आधार पर आगे की जांच की जाती है — जैसे हार्मोन टेस्ट, स्क्रूटल अल्ट्रासाउंड, जेनेटिक टेस्ट, या क्लिनिकल आवश्यकता के अनुसार स्पर्म डीएनए फ्रेगमेंटेशन (sperm DNA fragmentation) टेस्ट।
- इलाज हमेशा समस्या के कारण के अनुसार हो। पुरुष बांझपन के लिए कोई एक सामान्य इलाज नहीं होता — अलग-अलग रिपोर्ट और स्थिति के अनुसार ICSI, IUI, सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल, हार्मोन थेरेपी या लाइफस्टाइल बदलाव में से सही विकल्प चुना जाता है।
पुरुष बांझपन की चिंता को लेकर डॉ. श्वेता अग्रवाल से बात करने के लिए, या हमारी इन-हाउस एंड्रोलॉजी लैब में सीमेन एनालिसिस कराने के लिए, हमसे +91 80056 85160 पर संपर्क करें या WhatsApp पर संदेश भेजें। हम मराठी, हिंदी और अंग्रेजी में परामर्श (consultation) प्रदान करते हैं। आप जिस भाषा में सबसे अधिक सहज महसूस करते हैं, उसमें बिना किसी संकोच या झिझक के पुरुष बांझपन के बारे में खुलकर बात कर सकते हैं।