By Dr. Shweta Agarwal, MBBS, DGO Medically reviewed by Dr. Shweta Agarwal, MBBS, DGO Last updated: July 2026
Information on this page is educational and does not replace a medical consultation. Outcomes depend on individual clinical factors.
Aansh Hospital & IVF Center एक सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त Level-2 ART क्लिनिक है (Reg. No. MH/AC/2024/15441/L2/Chandrapur/132)। हमारा हेडक्वाटर और खुद की भ्रूण विज्ञान लैब (in-house embryology lab) चंद्रपुर में है, जहाँ हम विदर्भ और उत्तरी तेलंगाना के मरीज़ों का इलाज करते हैं। आप National ART & Surrogacy Registry पर हमारी सरकारी ART मान्यता चेक कर सकते हैं।
लगभग हर पहली सलाह (consultation) में मरीज़ घुमा-फिरा कर एक ही सवाल पूछते हैं: "डॉक्टर, मुझे यह समस्या है — क्या IVF सच में मेरे लिए सफल होगा?"
यह एक बहुत ही वाजिब सवाल है, और इंटरनेट पर इसके ज़्यादातर जवाब भ्रामक होते हैं। इंटरनेट पर सर्च करें "can IVF work with low AMH" या "does IVF work with endometriosis" और आपको हर बीमारी के लिए एक अलग पेज मिलेगा, जो अलग-अलग क्लिनिक्स ने लिखे होते हैं। और हर पेज के अंत में एक सफलता दर (success-rate) लिखी होती है, जिसका कोई ठोस आधार (denominator) नहीं होता। कोई भी इन सब बीमारियों को एक साथ रखकर तुलना नहीं करता, और कोई यह नहीं समझाता कि क्यों हर बीमारी में सफलता दर अलग होती है।
यह गाइड इसी कमी को पूरा करती है। चंद्रपुर क्लिनिक में हम मुख्य रूप से 5 तरह की समस्याएँ देखते हैं — low AMH, PCOS, endometriosis, blocked tubes, और male factor। इस गाइड में हम यह समझेंगे कि इनमें से हर समस्या IVF साइकिल में क्या बदलाव लाती है। इसमें हमने Aansh की कोई सफलता दर (success percentage) नहीं दी है, क्योंकि जब तक यह न बताया जाए कि वह दर कितने मरीज़ों पर, किस उम्र में और किस तरह की सफलता के लिए है, तब तक वह सिर्फ एक मार्केटिंग नंबर है, कोई मेडिकल आंकड़ा नहीं। अगर आप यह समझना चाहते हैं कि कोई क्लिनिक आपको जो सफलता दर बता रहा है, उसकी सच्चाई कैसे परखें, तो इस पेज के साथ IVF की सफलता दर के दावों को कैसे समझें ज़रूर पढ़ें।
चार मुख्य हिस्से (The four levers): अपनी रिपोर्ट को समझने का आसान तरीका
बीमारियों पर बात करने से पहले, एक ऐसा ढांचा (framework) समझना ज़रूरी है जिससे इस पेज को समझना बहुत आसान हो जाएगा। यह एक साधारण तरीका है, यह बताने का नहीं कि साइकिल क्यों सफल या फेल होती है — क्योंकि ओवरी का रिस्पॉन्स (ovarian response), भ्रूण का विकास (embryo development), गर्भाशय की स्थिति (uterine factors), सामान्य सेहत और किस्मत, ये सब भी अहम होते हैं।
एक IVF साइकिल को चार मुख्य चरणों से गुज़रना होता है, और ज़्यादातर बीमारियां इनमें से एक या दो को ही प्रभावित करती हैं:
- अंडों की संख्या (Egg number) — स्टिमुलेशन साइकिल (दवाइयों) से कितने परिपक्व (mature) अंडे मिलते हैं।
- अंडों की क्वालिटी (Egg quality) — उन अंडों में से कितने क्रोमोसोम (गुणसूत्र) के हिसाब से नॉर्मल हैं। यह किसी भी दूसरी चीज़ से ज़्यादा महिला की उम्र (female age) पर निर्भर करता है।
- फर्टिलाइज़ेशन (Fertilisation) — क्या स्पर्म (sperm) और अंडा मिलकर एक सही से विकसित होने वाला भ्रूण (embryo) बना पाते हैं।
- इम्प्लांटेशन (Implantation) — क्या एक अच्छा भ्रूण गर्भाशय की परत (uterine lining) से सही से चिपक पाता है।
यहाँ बताया गया है कि हर आम बीमारी इनमें से किस चरण पर असर डालती है। "सीधा असर नहीं (Not directly affected)" का मतलब है कि वह बीमारी खुद उस चरण पर असर नहीं डालती — हाँ, उस जोड़े में कोई और समस्या भी साथ में हो सकती है।
| समस्या (Diagnosis) | अंडों की संख्या (Egg number) | अंडों की क्वालिटी (Egg quality) | फर्टिलाइज़ेशन (Fertilisation) | इम्प्लांटेशन (Implantation) | IVF इसमें क्या करता है |
|---|---|---|---|---|---|
| Low AMH / diminished ovarian reserve | कम हो जाती है | सीधा असर नहीं; उम्र इसे तय करती है | सीधा असर नहीं | सीधा असर नहीं | कम अंडों की उम्मीद वाले मरीज़ के लिए अलग से स्टिमुलेशन (दवाइयां); कभी-कभी ट्रांसफर से पहले एक से ज़्यादा बार अंडे निकालने (retrieval) पड़ते हैं |
| PCOS | अक्सर ज़्यादा होती है | सीधा असर नहीं; निकाले गए कुछ अंडे अपरिपक्व (immature) हो सकते हैं | सीधा असर नहीं | मेटाबोलिक कारणों से असर पड़ सकता है | स्टिमुलेशन को इस तरह प्लान किया जाता है कि ओवरी बहुत ज़्यादा रिएक्ट न करे और OHSS का खतरा कम रहे; जहाँ ज़रूरी हो वहाँ सारे भ्रूण फ्रीज़ (freeze-all) किए जाते हैं |
| Endometriosis | कम हो सकती है, खासकर अगर सिस्ट (endometriomas) हों या पहले ओवरी की सर्जरी हुई हो | गंभीर बीमारी में असर पड़ सकता है | सीधा असर नहीं | असर पड़ सकता है | बंद ट्यूब और पेल्विक हिस्से की रुकावटों को बाईपास करता है; बीमारी की स्टेज, अंडों की संख्या और पिछली सर्जरी के आधार पर इलाज प्लान किया जाता है |
| Blocked fallopian tubes (बंद ट्यूब) | सीधा असर नहीं | सीधा असर नहीं | सीधा असर नहीं | सीधा असर नहीं — जब तक कि ट्यूब में पानी (hydrosalpinx) न भरा हो | ट्यूब को पूरी तरह बाईपास कर देता है। IVF का सबसे मुख्य काम यही है |
| Male factor (low count, low motility, poor morphology) | सीधा असर नहीं | सीधा असर नहीं | इस चरण पर असर पड़ता है | सीधा असर नहीं | ICSI के ज़रिए एक चुने हुए स्पर्म को सीधे अंडे में डाला जाता है, जिससे स्पर्म को तैरने या अंडे के अंदर घुसने की ज़रूरत नहीं पड़ती |
| Azoospermia (वीर्य में शुक्राणु न होना) | सीधा असर नहीं | सीधा असर नहीं | जब तक स्पर्म नहीं मिलता, तब तक असर रहता है | सीधा असर नहीं | सर्जरी से स्पर्म निकाला जाता है (TESA/PESA/micro-TESE) और फिर ICSI किया जाता है, अगर स्पर्म मिल जाए |
| महिला की बढ़ती उम्र (Advancing female age) | कम हो जाती है | कम हो जाती है — सबसे बड़ा असर यही होता है | सीधा असर नहीं | ज़्यादातर महिलाओं में गर्भाशय की क्षमता (uterine capacity) बनी रहती है | कोई भी चीज़ उम्र को वापस नहीं ला सकती। इसके विकल्प हैं: एक से ज़्यादा साइकिल (cumulative cycles), कुछ केस में PGT-A, या डोनर एग्स (donor eggs) |
इस टेबल को दो बार पढ़ें। इसमें सबसे काम की बात यह है कि जिन बीमारियों से मरीज़ सबसे ज़्यादा डरते हैं — जैसे बंद ट्यूब, कम स्पर्म काउंट — टेक्नोलॉजी उन्हीं का सबसे सीधा इलाज करती है, जबकि जिस चीज़ का टेक्नोलॉजी के पास कोई इलाज नहीं है, वह है बढ़ती उम्र।
Can IVF work with low AMH? (क्या low AMH में IVF सफल हो सकता है?)
संक्षिप्त जवाब (Short answer): हाँ। AMH सिर्फ यह बताता है कि आपकी ओवरीज़ दवाइयों (stimulation) पर कैसा रिस्पॉन्स देंगी — यानी कितने अंडे (eggs) मिलने की उम्मीद है। यह इस बात की कोई गारंटी नहीं देता कि बच्चा होगा या नहीं। अंडों की क्वालिटी आपके AMH से नहीं, बल्कि आपकी उम्र से तय होती है। Low AMH का मतलब है कि हर बार कम अंडे निकलेंगे, इसलिए ट्रांसफर से पहले एक से ज़्यादा बार अंडे निकालने (retrieval) की ज़रूरत पड़ सकती है।
AMH (anti-Müllerian hormone) ओवरी के अंदर मौजूद छोटे, रुके हुए फॉलिकल्स (follicles) से बनता है, इसलिए इसका ब्लड लेवल बताता है कि स्टिमुलेशन के लिए कितने फॉलिकल्स उपलब्ध हैं। यह जानकारी सच में काम की होती है — इसीलिए कोई भी साइकिल प्लान करने से पहले हम अल्ट्रासाउंड पर एंट्रल फॉलिकल काउंट (AFC) के साथ-साथ इसे भी चेक करते हैं।
AMH जो काम नहीं करता, वह है आपके अंडों की क्रोमोसोम (गुणसूत्र) संबंधी क्वालिटी को मापना। ओवेरियन रिज़र्व नापने वाले टेस्ट्स पर ASRM (अमेरिकन सोसाइटी फॉर रिप्रोडक्टिव मेडिसिन) की कमिटी की राय एकदम साफ है कि ये टेस्ट सिर्फ ओवरी के रिस्पॉन्स की भविष्यवाणी करते हैं, और सिर्फ AMH कम होने की वजह से किसी को इलाज के लिए मना नहीं करना चाहिए या यह नहीं कहना चाहिए कि वो माँ नहीं बन सकती। इलाज कराने वाले लोगों में AMH और बच्चे के जन्म के बीच एक कमज़ोर सा गणितीय संबंध (statistical association) ज़रूर है — लेकिन यह कोई कट-ऑफ (सीमा) नहीं है।
Low AMH के साथ असल में क्या बदलता है:
- प्रोटोकॉल (Protocol). स्टिमुलेशन (दवाइयों का तरीका) मरीज़ के हिसाब से तय किया जाता है, और सच यह है कि कम रिस्पॉन्स देने वाले (poor responders) मरीज़ों के लिए कोई एक "सबसे अच्छा" प्रोटोकॉल साबित नहीं हुआ है। ESHRE (यूरोपियन सोसाइटी ऑफ ह्यूमन रिप्रोडक्शन एंड एम्ब्रायोलॉजी) की ओवेरियन स्टिमुलेशन की गाइडलाइन्स बिना सोचे-समझे गोनैडोट्रोपिन (gonadotropin) का डोज़ बढ़ाने का समर्थन नहीं करती हैं; क्योंकि इस ग्रुप में बहुत ज़्यादा डोज़ देने से ज़्यादा अंडे मिलने का कोई सबूत नहीं है। हल्की ("mini") स्टिमुलेशन, एंटागोनिस्ट (antagonist) प्रोटोकॉल और साथ में दी जाने वाली कुछ दवाइयां (adjuvants) विकल्प हो सकते हैं, जिन पर हर मरीज़ से अलग से चर्चा की जाती है, ये कोई पक्के समाधान नहीं हैं।
- उम्मीद (Expected yield). कम अंडों का मतलब है कम भ्रूण (embryos), और इसलिए हर बार अंडे निकालने (retrieval) पर मौके भी कम मिलते हैं।
- रिट्रीवल की संख्या (Number of retrievals). जहाँ एक बार में बहुत कम भ्रूण बनते हैं, वहाँ कुछ मरीज़ भ्रूण ट्रांसफर करने से पहले एक से ज़्यादा बार अंडे निकलवाते हैं और भ्रूण फ्रीज़ कराते हैं। इससे सफलता के मौके तो बढ़ जाते हैं, लेकिन इसमें खर्च, समय और शारीरिक मेहनत भी ज़्यादा लगती है — और फिर भी बच्चे के जन्म (live birth) की गारंटी नहीं होती।
- साइकिल कैंसिल होने का रिस्क (Cancellation risk). जिस साइकिल में बहुत कम फॉलिकल्स बनते हैं, उसे रोका या कैंसिल किया जा सकता है। ऐसा होने पर पैसों का क्या होगा, यह अपने क्लिनिक से पहले ही पूछ लें; हमारे खर्च और EMI पेज पर बताया गया है कि हमारे पैकेज में ऐसे हालात को कैसे हैंडल किया जाता है।
ऐसा कोई यूनिवर्सल AMH कट-ऑफ नहीं है जिसके नीचे IVF करने से मना कर दिया जाए। अगर कोई क्लिनिक आपको कोई कट-ऑफ बताता है, तो वह उस क्लिनिक की अपनी पॉलिसी है, कोई बायोलॉजिकल सीमा नहीं। अगर आपको बताया गया है कि आपके AMH की वजह से आप IVF नहीं करा सकतीं, तो इसी स्थिति के लिए फ्री सेकंड ओपिनियन (मुफ्त दूसरी राय) की सुविधा दी जाती है।
हमारे low AMH और diminished ovarian reserve पेज पर इसके बारे में और पढ़ें, और हर उम्र में इस नंबर का क्या मतलब होता है, यह उम्र के हिसाब से AMH लेवल में जानें।
Does IVF work with PCOS — and is IVF even the right first step? (क्या PCOS में IVF सफल होता है — और क्या IVF ही सही पहला कदम है?)
संक्षिप्त जवाब (Short answer): हाँ, PCOS में IVF का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जाता है, और PCOS वाली ओवरीज़ में आमतौर पर औसत से ज़्यादा अंडे (eggs) बनते हैं। लेकिन PCOS में IVF अक्सर पहला इलाज नहीं होता। क्योंकि मुख्य समस्या ओव्यूलेशन (ovulation - अंडे का फूटना) की होती है, इसलिए कई महिलाएँ सिर्फ ओव्यूलेशन इंडक्शन (ovulation induction - अंडा बनाने की दवाइयों) से ही प्रेगनेंट हो जाती हैं। PCOS में IVF से जुड़ी मुख्य समस्या ज़्यादा रिस्पॉन्स आना और ओवेरियन हाइपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम (OHSS) का रिस्क होना है।
PCOS ओव्यूलेशन (ovulation) की बीमारी है, अंडों की कमी की नहीं। इसके तीन व्यावहारिक परिणाम होते हैं।
पहला, इलाज की सीढ़ी नीचे से शुरू होती है। PCOS के मूल्यांकन और मैनेजमेंट के लिए 2023 की इंटरनेशनल एविडेंस-बेस्ड गाइडलाइन (International Evidence-Based Guideline) के मुताबिक, जिन महिलाओं को PCOS है और अंडे नहीं बन रहे (anovulatory infertility), और कोई अन्य समस्या नहीं है, उनके लिए ओव्यूलेशन इंडक्शन (ovulation induction) की पहली दवाई लेट्रेज़ोल (letrozole) होनी चाहिए। क्लोमिफीन (clomiphene) इसका एक विकल्प है, और कुछ मामलों में मेटफॉर्मिन (metformin) दी जाती है। अगर इन दवाइयों से प्रेगनेंसी नहीं होती है, या अगर कोई और समस्या है — जैसे बंद ट्यूब, पुरुष में कोई बड़ी समस्या, या बांझपन का लंबा समय — तब IUI और फिर IVF का नंबर आता है। इसके साथ-साथ वज़न, इंसुलिन रेजिस्टेंस (insulin resistance) और थायरॉइड का भी इलाज किया जाता है, क्योंकि वे ओव्यूलेशन पर अलग से असर डालते हैं।
दूसरा, स्टिमुलेशन को ओवर-रिस्पॉन्स (ज़्यादा रिस्पॉन्स) के रिस्क को ध्यान में रखकर प्लान किया जाना चाहिए। PCOS वाली ओवरीज़ में आमतौर पर बहुत सारे छोटे फॉलिकल्स होते हैं और वे गोनैडोट्रोपिन (gonadotropin) दवाइयों पर बहुत ज़्यादा रिस्पॉन्स दे सकती हैं। हम जिस परेशानी से बचना चाहते हैं वह है OHSS। एंटागोनिस्ट (antagonist) प्रोटोकॉल और GnRH-एगोनिस्ट (agonist) ट्रिगर इस रिस्क को कम करते हैं, और जहाँ ज़रूरी हो वहाँ फ्रीज़-ऑल (freeze-all) तरीका अपनाया जाता है — यानी भ्रूणों को फ्रीज़ कर लिया जाता है और बाद में, बिना दवाइयों वाली साइकिल में ट्रांसफर किया जाता है। यह रिस्क को कम करने का एक रूटीन तरीका है, इसका मतलब यह नहीं कि कुछ गलत हो गया है। किसी भी क्लिनिक से पूछें कि आपके लिए उनका OHSS-बचाव प्लान क्या है; अगर क्लिनिक के पास PCOS मरीज़ के लिए कोई पक्का जवाब नहीं है, तो आपको उनसे और सवाल पूछने चाहिए।
तीसरा, ज़्यादा अंडों का मतलब यह नहीं कि भ्रूण (embryo) भी ज़्यादा बनेंगे। PCOS साइकिल में, निकाले गए अंडों में से कुछ अपरिपक्व (immature) और बेकार हो सकते हैं, इसलिए सही से फर्टिलाइज़ (fertilise) होने वाले अंडों की संख्या उतनी नहीं होती जितनी अंडों की गिनती से लगती है। अगर आप पहले से यह बात जानते हैं, तो अगले दिन क्लिनिक से आने वाला फोन आपको झटका नहीं देगा।
निदान (diagnosis) और लंबे समय के मैनेजमेंट के बारे में हमारे PCOS / PCOD पेज पर और पढ़ें, और इलाज चुनने के फैसले के बारे में IVF बनाम IUI: हम कैसे तय करते हैं में पढ़ें।
Does IVF work with endometriosis? (क्या endometriosis में IVF सफल होता है?)
संक्षिप्त जवाब (Short answer): हाँ — endometriosis से होने वाले बांझपन के लिए IVF एक स्थापित (established) इलाज है, और यह बीमारी की वजह से ट्यूब और पेल्विक हिस्से (pelvis) में होने वाली रुकावटों को बाईपास कर देता है। यह endometriosis के हर असर को खत्म नहीं करता: ओवेरियन रिज़र्व (अंडों की संख्या), एंडोमेट्रियोमा (endometriomas - चॉकलेट सिस्ट), ओवरी की पिछली सर्जरी, सूजन (inflammation) और इम्प्लांटेशन पर पड़ने वाला संभावित असर अभी भी नतीजे को प्रभावित करते हैं। सफलता की संभावना का अंदाज़ा सिर्फ बीमारी के नाम से नहीं, बल्कि हर मरीज़ की व्यक्तिगत स्थिति से लगाया जाना चाहिए।
Endometriosis फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) को एक साथ कई तरीकों से मुश्किल बना सकता है: पेल्विक हिस्से की बनावट का बिगड़ना और चिपचिपापन (adhesions), पेल्विक वातावरण में सूजन (inflammation), ओवेरियन रिज़र्व का कम होना (खासकर जहाँ एंडोमेट्रियोमा हो या पहले ओवरी के टिशू की सर्जरी हुई हो), और एंडोमेट्रियम (गर्भाशय की परत) के भ्रूण ग्रहण करने की क्षमता पर संभावित असर। IVF ट्यूब के ज़रिए अंडे के सफर की ज़रूरत को पूरी तरह खत्म कर देता है — अंडे सीधे ओवरी से निकाले जाते हैं और भ्रूण को सीधे गर्भाशय में रखा जाता है। लेकिन यह कम हो चुके ओवेरियन रिज़र्व (अंडों की संख्या) को वापस नहीं ला सकता, और जब पेल्विस की बनावट बहुत बिगड़ी हुई हो, तो अंडे निकालने (retrieval) का काम आसान नहीं हो जाता।
यही वजह है कि सर्जरी पहले करें या IVF, यह फैसला बहुत अहम होता है, और यह सच में एक मुश्किल फैसला है: एंडोमेट्रियोमा के लिए बार-बार ओवरी की सिस्ट निकालने की सर्जरी (ovarian cystectomy) से अंडों की संख्या (reserve) और कम होने का रिस्क रहता है। ESHRE की endometriosis गाइडलाइन सलाह देती है कि सिर्फ ART (IVF) से बच्चे के जन्म की संभावना बढ़ाने के लिए एंडोमेट्रियोमा की सर्जरी नहीं करनी चाहिए, लेकिन यह भी मानती है कि दर्द के लिए या फॉलिकल्स तक पहुँचने के लिए सर्जरी ज़रूरी हो सकती है। हमने इस फैसले को सर्जरी या सीधे IVF? बंद ट्यूब और endometriosis में विस्तार से समझाया है।
मरीज़ अक्सर दो और सवाल पूछते हैं:
- क्या IVF से endometriosis और बिगड़ जाता है? IVF स्टिमुलेशन (दवाइयों) से कुछ समय के लिए एस्ट्रोजन (oestrogen) लेवल बढ़ जाता है, जो इस एस्ट्रोजन पर निर्भर रहने वाली बीमारी में एक वाज़िब सैद्धांतिक चिंता है। ESHRE की गाइडलाइन मरीज़ों को यह भरोसा दिलाने का समर्थन करती है कि ART (IVF) से endometriosis के वापस आने (recurrence) का खतरा बढ़ता हुआ नहीं दिखता। फिर भी, अगर स्टिमुलेशन के दौरान दर्द बढ़ता है तो इसके बारे में बताना चाहिए ताकि इसे मैनेज किया जा सके।
- क्या endometriosis के लिए IVF, IUI से बेहतर है? ऐसा कोई आसान नियम नहीं है कि एक तय स्टेज का मतलब एक तय इलाज ही है। जहाँ बीमारी बढ़ चुकी है, जहाँ ट्यूब प्रभावित हैं, या जहाँ कोई और समस्या भी है, वहाँ IVF आमतौर पर ज़्यादा सीधा रास्ता होता है; जहाँ बीमारी बहुत कम है, ट्यूब खुले हैं और पुरुष में कोई समस्या नहीं है, वहाँ कुछ समय इंतज़ार करना (expectant management) या IUI करना भी एक वाज़िब पहला कदम हो सकता है। चुनाव एक व्यक्तिगत चर्चा के बाद होना चाहिए, किसी फॉर्मूले से नहीं।
लक्षणों, जांच (diagnosis) और पूरी इलाज प्रक्रिया के लिए हमारा endometriosis पेज देखें।
Does IVF work with blocked fallopian tubes? (क्या बंद ट्यूब होने पर IVF काम करता है?)
संक्षिप्त जवाब (Short answer): हाँ — बंद ट्यूब (blocked tubes) ही वह मूल और सबसे सीधा कारण है जिसके लिए IVF शुरू किया गया था। ट्यूब का काम अंडे और स्पर्म को मिलाना और भ्रूण को गर्भाशय (uterus) तक ले जाना होता है; IVF इन दोनों कामों को लेबोरेटरी (लैब) में करता है। अगर सिर्फ ट्यूब ही समस्या है, तो सफलता की संभावना आपके ट्यूब बंद होने से नहीं, बल्कि आपकी उम्र और ओवेरियन रिज़र्व (अंडों की संख्या) से तय होती है।
इसमें एक ज़रूरी अपवाद (exception) है: हाइड्रोसाल्पिंक्स (hydrosalpinx), यह एक ऐसी ट्यूब होती है जो आगे से बंद होती है और जिसमें पानी (fluid) भरा होता है। यह पानी वापस गर्भाशय में जा सकता है, और यह माना हुआ सच है कि बिना इलाज वाले हाइड्रोसाल्पिंक्स से सफल ट्रांसफर की संभावना कम हो जाती है। IVF से पहले ट्यूब की बीमारी के लिए सर्जरी पर Cochrane के रिव्यु (review) में पाया गया कि लेप्रोस्कोपिक सल्पिंगेक्टोमी (laparoscopic salpingectomy - ट्यूब निकालना) शायद क्लिनिकल प्रेगनेंसी रेट बढ़ाती है। अगर ट्यूब शुरुआत से बंद हो या पानी निकालने (aspiration) के लिए इसके सबूत कमज़ोर हैं, और बच्चे के जन्म के आंकड़े (live-birth data) कुल मिलाकर सीमित हैं। भ्रूण ट्रांसफर करने से पहले प्रभावित ट्यूब का इलाज करना — आमतौर पर उसे निकालकर (removal) या क्लिप लगाकर (clipping), और जहाँ लेप्रोस्कोपी सही न हो वहाँ पानी निकालना (aspiration) — स्टैंडर्ड प्रैक्टिस है। ओवरी एक अलग अंग है और ट्यूब निकालने के बाद भी अपना काम करती रहती है, हालाँकि पेल्विक हिस्से की किसी भी सर्जरी में इसके जोखिमों (risks) पर चर्चा होनी चाहिए, जिसमें ओवरी को मिलने वाले खून पर इसका असर भी शामिल है।
सीधे IVF में जाने के बजाय क्या प्राकृतिक रूप से फर्टिलिटी वापस लाने के लिए ट्यूब की सर्जरी करानी चाहिए, यह इस बात पर निर्भर करता है कि रुकावट किस तरह की है, कहाँ है, आपकी उम्र क्या है, और क्या कोई और समस्या तो नहीं है। एक युवा महिला में अगर सामान्य ट्यूब के आस-पास हल्की रुकावट (adhesions) हो, तो उसे खोलना सही हो सकता है; लेकिन बहुत बुरी तरह खराब हो चुकी ट्यूब में ऐसा करना ठीक नहीं होता, और ऐसी स्थिति में सर्जरी से अस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy - ट्यूब में प्रेगनेंसी) का रिस्क भी बढ़ जाता है। इस तुलना को सर्जरी या सीधे IVF? में समझाया गया है, और जिस टेस्ट से रुकावट का पता चलता है, उसके बारे में HSG टेस्ट: क्या उम्मीद करें में बताया गया है।
कारणों और विकल्पों के बारे में हमारे बंद फैलोपियन ट्यूब पेज पर और पढ़ें।
Does IVF work for male infertility, and can IVF work with low sperm motility? (क्या male infertility के लिए IVF काम करता है, और क्या low sperm motility में IVF सफल हो सकता है?)
संक्षिप्त जवाब (Short answer): ज़्यादातर मामलों में, हाँ। Male factor (पुरुष बांझपन) फर्टिलाइज़ेशन (fertilisation) चरण पर असर डालता है, और ICSI एक चुने हुए स्पर्म (sperm) को सीधे अंडे (egg) के अंदर डालकर इस समस्या को हल करता है। इससे स्पर्म को तैरकर अंडे तक जाने और उसके अंदर घुसने की ज़रूरत नहीं पड़ती। इसके लिए बस ज़िंदा (viable) स्पर्म चाहिए, न कि नॉर्मल सीमेन (semen) रिपोर्ट। अंडों की क्वालिटी, स्पर्म के DNA की अखंडता (integrity) और भ्रूण (embryo) का विकास अभी भी नतीजे को प्रभावित करते हैं।
यह वह सेक्शन है जहाँ इंटरनेट सबसे ज़्यादा गुमराह करता है, क्योंकि यह सीमेन एनालिसिस (semen analysis) के नॉर्मल नंबरों को ऐसे पेश करता है जैसे वे IVF के लिए ज़रूरी शर्तें (eligibility criteria) हों। ऐसा नहीं है। WHO के संदर्भ मूल्य (reference values) उन पुरुषों की निचली सीमा बताते हैं जिनकी पार्टनर्स एक साल के अंदर स्वाभाविक रूप से (naturally) प्रेगनेंट हो गईं। वे नेचुरल प्रेगनेंसी की बात करते हैं। लेबोरेटरी (लैब) में ज़रूरत अलग होती है।
- Low motility (कम गतिशीलता). पारंपरिक IVF (Conventional IVF) — जहाँ स्पर्म और अंडों को एक साथ डिश में रखा जाता है — इस बात पर निर्भर करता है कि स्पर्म अंडे तक पहुँचे और उसके अंदर घुसे, इसलिए अगर मोटिलिटी काफी कम है तो इस तरीके में सच में दिक्कत आती है। यही कारण है कि गंभीर male factor में ICSI को चुना जाता है: एम्ब्रियोलॉजिस्ट (embryologist) एक-एक तैरने वाले स्पर्म को चुनते हैं और उन्हें इंजेक्ट (inject) करते हैं। ऐसा कोई मोटिलिटी प्रतिशत (motility percentage) नहीं छपा है जिसके नीचे इलाज नामुमकिन हो जाता है; जो बात मायने रखती है वह यह है कि क्या सैंपल में ज़िंदा स्पर्म मिल सकते हैं।
- Low count (oligozoospermia - शुक्राणुओं की कमी). यहाँ भी वही बात लागू होती है। एक साइकिल में बस इतने ज़िंदा स्पर्म चाहिए होते हैं जितने परिपक्व (mature) अंडे निकाले गए हैं, जो कि नेचुरल प्रेगनेंसी के लिए ज़रूरी स्पर्म की संख्या से बहुत कम है।
- Poor morphology (teratozoospermia - शुक्राणुओं का आकार खराब होना). मॉर्फोलॉजी (आकार) ICSI फर्टिलाइज़ेशन के मुकाबले नेचुरल और पारंपरिक-IVF फर्टिलाइज़ेशन की भविष्यवाणी ज़्यादा बेहतर करती है। अगर काउंट और मोटिलिटी नॉर्मल है और सिर्फ मॉर्फोलॉजी खराब है, तो केवल इसी आधार पर ICSI करने की सलाह नहीं दी जाती, और नॉन-मेल-फैक्टर (non-male-factor) के लिए ICSI पर ASRM का मार्गदर्शन भी यही बताता है कि ऐसे मामलों में इसके फायदे के सबूत सीमित हैं। यह फैसला पूरी स्थिति को देखकर किया जाता है, न कि रिपोर्ट की सिर्फ एक लाइन पर।
- Azoospermia — "मेरे पति के वीर्य (semen) में स्पर्म नहीं है, मैं प्रेगनेंट कैसे हो सकती हूँ?" वीर्य (ejaculate) में स्पर्म न होने का मतलब यह नहीं है कि स्पर्म बन ही नहीं रहे हैं। ऑब्सट्रक्टिव एज़ोस्पर्मिया (obstructive azoospermia - रुकावट के कारण स्पर्म न होना) में, स्पर्म आमतौर पर नॉर्मल बनते हैं और ICSI के लिए सर्जरी (TESA/PESA) से स्पर्म निकाले जा सकते हैं। नॉन-ऑब्सट्रक्टिव एज़ोस्पर्मिया (non-obstructive azoospermia - स्पर्म बनने में ही दिक्कत होना) में भी, माइक्रो-TESE (micro-TESE) से कुछ पुरुषों में स्पर्म मिल सकते हैं, और यह संभावना इस बात पर निर्भर करती है कि इसका मुख्य कारण क्या है। जहाँ कोई स्पर्म नहीं मिल पाता, वहाँ ART (रेगुलेशन) एक्ट 2021 के तहत रजिस्टर्ड ART बैंक से डोनर स्पर्म (donor sperm) लेना ही आखिरी रास्ता बचता है। हमारा azoospermia पेज इन दोनों के बीच के फर्क और उन्हें अलग करने वाले टेस्ट्स को समझाता है।
- High DNA fragmentation (DNA का बहुत ज़्यादा टूटना). स्पर्म DNA की अखंडता उन कई चीज़ों में से एक है जिसे ICSI ठीक नहीं करता, क्योंकि इंजेक्ट किया गया स्पर्म अभी भी अपना जेनेटिक कोड भ्रूण (embryo) को देता है। टेस्टिंग (DFI) चुनिंदा मामलों में की जाती है जहाँ मेडिकल हिस्ट्री (history) इसे ज़रूरी बताती है। इसके लिए मौजूद इलाज — लाइफस्टाइल में बदलाव, वैरिकोसेल (varicocele) का इलाज, एंटीऑक्सीडेंट (antioxidants), या वीर्य के बजाय टेस्टिस (testicles) से स्पर्म का इस्तेमाल — ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ सबूत अभी भी सीमित हैं, और किसी को भी पक्के समाधान के तौर पर पेश नहीं किया जाना चाहिए।
एक ज़रूरी बात जिसे साफ तौर पर कहना ज़रूरी है: ICSI फर्टिलाइज़ेशन (fertilisation) में मदद करता है। यह अंडों की क्वालिटी नहीं सुधारता, और जिन जोड़ों को male factor की समस्या नहीं है, उनमें इसके नतीजे बेहतर होने का कोई सबूत नहीं मिला है। इसीलिए हम इसे हर किसी के लिए इस्तेमाल नहीं करते — यह फैसला ICSI बनाम IVF: ICSI की ज़रूरत कब होती है में बताया गया है।
एक सही शुरुआती जानकारी से शुरू करें: सीमेन एनालिसिस के नंबरों का क्या मतलब है, और हमारा male infertility (पुरुष बांझपन) पेज।
At what age is IVF likely to fail, and what are the chances of IVF working at 45? (किस उम्र में IVF के फेल होने की संभावना ज़्यादा होती है, और 45 की उम्र में IVF के सफल होने के कितने चांस हैं?)
संक्षिप्त जवाब (Short answer): ऐसी कोई उम्र नहीं है जिस पर IVF अचानक काम करना बंद कर दे। महिला के अपने अंडों (own eggs) से बच्चे के जन्म (live-birth) की दर शुरुआती तीस (early thirties) के दशक से धीरे-धीरे कम होने लगती है और तीस के दशक के अंत और चालीस के दशक (forties) में तेज़ी से गिरती है। UK HFEA रजिस्ट्री का डेटा बताता है कि 45 के आस-पास (mid-forties) की उम्र में, अपने अंडों (own-egg) वाले ग्रुप में प्रति भ्रूण ट्रांसफर (per embryo transferred) बच्चे के जन्म की दर बहुत कम (low single digits) होती है, जबकि डोनर-एग (donor-egg) के साथ उसी उम्र में यह दर काफी ज़्यादा होती है।
उम्र इस पेज पर एकमात्र ऐसा कारक है जिसे कोई प्रोटोकॉल, सप्लीमेंट या लैब की तकनीक पलट (reverse) नहीं सकती। इसका कारण क्रोमोसोमल (chromosomal) है: माँ की उम्र बढ़ने के साथ-साथ क्रोमोसोम के हिसाब से असामान्य (abnormal) अंडों का प्रतिशत बढ़ता है, और एनेयूप्लोइड (aneuploid - असामान्य क्रोमोसोम वाले) भ्रूण या तो चिपकते (implant) नहीं हैं या जल्दी मिसकैरेज (miscarriage) हो जाते हैं। यही एक कारण बड़ी उम्र की महिलाओं में प्रेगनेंसी रेट गिरने और मिसकैरेज रेट बढ़ने, दोनों को समझाता है।
इस उम्र के ग्रुप के लिए आप जो भी आंकड़ा पढ़ते हैं, उसके बारे में दो सावधानियां बरतें (जिसमें ऊपर दिया गया आंकड़ा भी शामिल है)। पहला, रजिस्ट्री के आंकड़े एक विशिष्ट आधार (denominator) के साथ प्रकाशित होते हैं — HFEA के मुख्य नंबर प्रति भ्रूण ट्रांसफर (per embryo transferred) होते हैं, न कि शुरू की गई प्रति साइकिल (per cycle started) के हिसाब से, और दोनों का मतलब एक नहीं होता। दूसरा, वे यूके (UK) का डेटा हैं; वे एक आबादी (population) के बारे में बताते हैं, आपके बारे में नहीं, और भारत के बारे में भी नहीं। वे सिर्फ एक अंदाज़ा (order of magnitude) लगाने के लिए उपयोगी हैं, इससे ज़्यादा कुछ नहीं।
मध्य-चालीस (mid-forties) की उम्र में इसका व्यावहारिक रूप से क्या मतलब है:
- अपने अंडों (own-egg) से IVF नामुमकिन नहीं है, लेकिन प्रति प्रयास (per attempt) मौका कम होता है, और ईमानदार बातचीत इस बात पर होती है कि आप कितने प्रयासों के लिए तैयार हैं और अगर वे सफल नहीं होते हैं तो आप क्या करेंगे।
- ज़्यादा साइकिल से कुल मौका (cumulative chance) बढ़ता है, लेकिन इस उम्र में हर साइकिल से आमतौर पर कम अंडे मिलते हैं और कम क्रोमोसोम रूप से सामान्य (chromosomally normal) भ्रूण बनते हैं, इसलिए कुल सफलता का ग्राफ (cumulative curve) चपटा (flatten) हो जाता है।
- डोनर एग (Donor egg) IVF से सफलता की संभावना काफी बदल जाती है, क्योंकि भ्रूण में डोनर का क्रोमोसोमल प्रोफाइल होता है जबकि गर्भाशय (uterus) में प्रेगनेंसी ढोने की क्षमता बनी रहती है। Aansh में यह सुविधा केवल हमारे रजिस्टर्ड ART बैंक (Reg. No. MH/AB/2024/11445/Chandrapur/91) के ज़रिए ही दी जाती है; डोनर की भर्ती, जांच और मैचिंग ART (Regulation) Act 2021 के नियमों के अनुसार होनी चाहिए, जो 21 साल से ऊपर और 50 साल से कम उम्र की महिला को ART सेवाएं देने की अनुमति देता है।
- अगर कोई क्लिनिक आपको 45 साल की उम्र में अपने अंडों के साथ बहुत ज़्यादा सफलता दर (success rate) बताता है, तो उनसे पूछें कि यह दर किस आधार (denominator) पर, किस उम्र के ग्रुप के लिए और कितनी साइकिल से निकाली गई है।
इसकी बायोलॉजी को IVF की सफलता और उम्र: यथार्थवादी उम्मीदें में विस्तार से समझाया गया है।
Is IVF more successful the second time? And what about the third? (क्या दूसरी बार IVF ज़्यादा सफल होता है? और तीसरी बार के बारे में क्या?)
प्रति-साइकिल सफलता दर (Per-cycle success rates) हर प्रयास के साथ अपने आप नहीं बढ़ती है — लेकिन बच्चे के जन्म की आपकी कुल (cumulative) संभावना हर अतिरिक्त साइकिल के साथ बढ़ जाती है, और पहली फेल हुई साइकिल सच में ऐसी जानकारी देती है जो पहले प्रयास में नहीं मिल सकती थी।
एक साइकिल के बाद हम उन चीज़ों को जान जाते हैं जिनका हम पहले सिर्फ अंदाज़ा लगा सकते थे: किसी दी गई डोज़ पर ओवरीज़ ने कैसा रिस्पॉन्स दिया, कितने अंडे परिपक्व (mature) हुए, कितने फर्टिलाइज़ (fertilise) हुए, कल्चर (लैब) में भ्रूण कैसे विकसित हुए, और ट्रांसफर के समय एंडोमेट्रियम (endometrium - गर्भाशय की परत) कैसा दिख रहा था। इनमें से हर एक चीज़ को सुधारा (adjust) जा सकता है। राष्ट्रीय डेटाबेस (national datasets) के रजिस्ट्री-आधारित विश्लेषण (registry-based analyses) लगातार दिखाते हैं कि लगातार साइकिल के साथ बच्चे के जन्म की कुल दर (cumulative live-birth rates) बढ़ती रहती है, जिसमें सबसे ज़्यादा फायदा शुरुआती प्रयासों में होता है — जो इलाज को एक बार की घटना के बजाय एक कोर्स (course) के रूप में प्लान करने का सबसे बड़ा कारण है, और इसीलिए मल्टी-साइकिल पैकेज स्ट्रक्चर बनाए जाते हैं।
जहाँ अच्छी क्वालिटी के भ्रूण (good-quality embryos) ट्रांसफर किए गए हों लेकिन प्रेगनेंसी न हुई हो, वहाँ स्थिति बदल जाती है और जांच का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए। ESHRE की बार-बार इम्प्लांटेशन फेल होने (recurrent implantation failure) की सिफ़ारिशें जानबूझकर "कितने ट्रांसफर फेल हुए" (number of failed transfers) वाली पक्की परिभाषा से बचती हैं, इसके बजाय इसे उन विशेष भ्रूणों की कुल संभावना (cumulative chance) के आधार पर देखती हैं जो उन्हें मिलनी चाहिए थी — और वे रूटीन (routine) इम्यूनोलॉजिकल टेस्टिंग (immunological testing) और इलाज के खिलाफ चेतावनी देती हैं। थ्रोम्बोफिलिया (thrombophilia) टेस्टिंग हर किसी के लिए नहीं की जाती, बल्कि इसे व्यक्तिगत (personal) और पारिवारिक इतिहास (family history) के आधार पर किया जाना चाहिए। जो नहीं होना चाहिए वह है एक जैसी अगली साइकिल (identical further cycle) बिना यह पूछे कि पिछली साइकिल क्यों काम नहीं की। अगर आप इस स्थिति में हैं, तो अपनी रिपोर्ट्स एक फ्री सेकंड ओपिनियन (मुफ्त दूसरी राय) के लिए लाएँ। बार-बार इम्प्लांटेशन फेल होना पर हमारा पेज इस जांच (workup) को समझाता है।
पहली बार नेगेटिव आने पर होने वाली भावनात्मक तकलीफ (emotional side) के लिए, ऊपर दी गई किसी भी चीज़ से ज़्यादा फेल IVF साइकिल के बाद खुद को कैसे संभालें पढ़ना आपके लिए मददगार हो सकता है।
When IVF is not the right first step (जब IVF पहला सही कदम न हो)
एक ईमानदार कंडीशन-बाय-कंडीशन (condition-by-condition) गाइड में उन मामलों को भी शामिल किया जाना चाहिए जहाँ "क्या मुझे IVF करना चाहिए?" का जवाब "अभी नहीं" होता है।
- PCOS जिसमें कोई और समस्या (factor) न हो। ओव्यूलेशन इंडक्शन (ovulation induction - अंडे बनाने की दवा), वज़न और मेटाबोलिक मैनेजमेंट पहले आता है।
- हल्का मेल फैक्टर (Mild male factor), खुली ट्यूब और महिला पार्टनर की उम्र कम होना। IUI अक्सर एक वाज़िब और काफी कम खर्चीला पहला प्रयास होता है।
- कोशिश करते हुए कम समय हुआ हो, और कोई बड़ी समस्या (red flags) न हो। इलाज से पहले जांच (Investigation) आती है; 12-महीने का नियम बताता है कि यह नियम कब बदलता है, और महिला की उम्र बढ़ने के साथ इंतज़ार करने का समय (threshold) क्यों कम हो जाता है।
- बिना इलाज किया हुआ हाइड्रोसाल्पिंक्स (hydrosalpinx)। भ्रूण ट्रांसफर (embryo transfer) करने से पहले ट्यूब का इलाज करें।
- थायरॉइड (thyroid) या शुगर (diabetes) का कंट्रोल में न होना, या BMI का बहुत ज़्यादा या बहुत कम होना। पहले इन्हें ठीक करने से इलाज के नतीजे (treatment outcomes) और प्रेगनेंसी की सुरक्षा (pregnancy safety) दोनों बेहतर होते हैं।
- अभी तक कोई डायग्नोसिस (diagnosis - बीमारी का पता) नहीं हुआ है। किसी भी इलाज की सलाह से पहले दोनों पार्टनर्स की पूरी जांच — फर्टिलिटी टेस्टिंग 101 — होनी चाहिए। अगर कोई क्लिनिक सीमेन एनालिसिस (semen analysis) किए बिना ही IVF की सलाह देता है, तो सिर्फ यही बात सेकंड ओपिनियन (second opinion) लेने के लिए काफी है।
इस ज़िले में पूछे जाने वाले एक सवाल पर ध्यान दें जिसका जवाब क्लीनिकल (clinical) नहीं बल्कि कानूनी (legal) है: PCPNDT Act के तहत भारत में भ्रूण का लिंग चयन (sex selection of embryos) गैरकानूनी है, और कोई भी क्लिनिक किसी भी कारण से यह सुविधा नहीं दे सकता। जो कोई भी इसकी पेशकश कर रहा है वह कानून के खिलाफ काम कर रहा है।
Talk it through with us
अगर आपको कोई समस्या (diagnosis) बताई गई है और आप यह नहीं समझ पा रहे हैं कि इसका आपके माँ बनने की संभावनाओं पर क्या असर पड़ेगा, तो हमारे पास आएँ। डॉ. श्वेता अग्रवाल एक फ्री सेकंड ओपिनियन (मुफ्त दूसरी राय) देती हैं — अपनी AMH रिपोर्ट, अल्ट्रासाउंड, HSG, सीमेन एनालिसिस (semen analysis), या किसी भी क्लिनिक की पिछली साइकिल की समरी (summary) साथ लाएँ, और आपको सही जानकारी मिलेगी कि आपकी रिपोर्ट्स असल में क्या कहती हैं और आपके लिए व्यावहारिक (realistic) विकल्प क्या हैं।
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Sources referenced
- American Society for Reproductive Medicine (ASRM) — Practice Committee opinion on testing and interpreting measures of ovarian reserve (AMH and AFC predict ovarian response; a low result alone should not deny access to treatment).
- ASRM — Practice Committee opinion on intracytoplasmic sperm injection for non-male-factor indications (limited evidence of benefit outside male factor).
- ESHRE — guideline on ovarian stimulation for IVF/ICSI (individualised dosing; no established superior protocol for predicted poor responders).
- ESHRE — endometriosis guideline (surgery for endometrioma not recommended solely to improve ART live-birth outcomes; ART does not appear to increase recurrence).
- ESHRE — recommendations on recurrent implantation failure (individualised definition; immunological testing and treatment not routine).
- International Evidence-Based Guideline for the Assessment and Management of Polycystic Ovary Syndrome, 2023 (letrozole first-line for ovulation induction in anovulatory PCOS without other infertility factors).
- Cochrane Database of Systematic Reviews — surgical treatment for tubal disease in women due to undergo IVF (salpingectomy for hydrosalpinx).
- Human Fertilisation and Embryology Authority (HFEA), UK — fertility treatment trends and figures, age-banded live birth per embryo transferred.
- World Health Organization — laboratory manual reference values for semen analysis (describing natural conception, not IVF eligibility).
- The Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021, and the PCPNDT Act, 1994 (India).